राजनांदगाँव | शासकीय दिग्विजय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, राजनांदगाँव में दिनांक 30 अप्रैल 2025 को मानव संसाधन प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित तथा स्वशासी प्रकोष्ठ द्वारा प्रायोजित सात दिवसीय कार्यशाला के समापन समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं शिक्षण पद्धति (Pedagogy) विषय पर एक विशेष व्याख्यान डॉ. राजेश पांडे, अपर निदेशक , उच्च शिक्षा, दुर्ग संभाग, द्वारा प्रस्तुत किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही प्राचार्य डॉ. सुचित्रा गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि भारत प्राचीन काल से ही ज्ञान का केंद्र रहा है, परंतु आधुनिकता के प्रभाव के कारण हम अपनी मूल भारतीय ज्ञान परंपराओं को अपनाने से विमुख हो रहे हैं। आज की सबसे बड़ी चुनौती ‘rootlessness’ यानी हमारी सांस्कृतिक और बौद्धिक जड़ों से कटाव है। उन्होंने कहा कि कोई भी विकास तभी स्थायी और सार्थक हो सकता है, जब वह अपनी जड़ों से जुड़ा हो।डॉ. राजेश पांडे ने अपने व्याख्यान में भारतीय ज्ञान प्रणाली की वैज्ञानिक गहराई को सहज एवं प्रभावशाली भाषा में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि भारतीय ज्ञान प्रणाली केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि वह वैज्ञानिक और बौद्धिक दृष्टिकोण है, जो शिक्षा को जीवन के वास्तविक अनुभवों से जोड़ती है ।प्राचीन भारत में खगोलशास्त्र और गणित का गहरा अध्ययन होता था।भारतीय ऋषियों की खगोलीय गणनाएँ कितनी सटीक और वैज्ञानिक रही हैं, जहाँ 108 केवल एक संख्या नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय संतुलन का प्रतीक है। समारोह में महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकगण, अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सहायक प्राध्यापक श्री हीरेन्द्र ठाकुर द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन मानव संसाधन प्रकोष्ठ की संयोजिका डॉ. प्रीतिबाला टांक द्वारा प्रस्तुत किया गया। अंत में उपस्थित सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।