संत रविदास जयंती का उल्लासपूर्ण आयोजन
राजनांदगांव। जिला रविदास समाज सेवा समिति राजनांदगॉव के तत्वाधान में बजरंगपुर नवागॉव में जिला स्तरीय संत शिरोमणि रविदास जी की जयंती उत्साहपूर्वक मनायी गई। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में, सुदेश देशमुख, पूर्व महापौर, राजनांदगॉव रहे जबकि कार्यक्रम में अध्यक्षता किशुन यदु, नेता प्रतिपक्ष, नगर पालिक निगम राजनांदगॉव ने की। विशेष अतिथि के रूप में डॉ.के.एल.टाण्डेकर, प्राचार्य, दिग्विजय महाविद्यालय राजनांदगॉव तथा डॉ.एस.आर.कन्नौजे प्राध्यापक, शास.शिवनाथ विज्ञान महाविद्यालय राजनांदगॉव उपस्थित रहे।अतिथिगणों का उद्बोधन:-
मुख्य अतिथि सुदेश देशमुख ने अपने उद्बोधन में कहा कि संत रविदास मध्यकाल के ऐसे संत समाज सुधारक एवं विचारक रहे, जिन्होंने सामाजिक बुराईयों का पुरजोर विरोध किया और समतामूलक सामाजिक, राजनैतिक व्यवस्था की परिकल्पना की। बराबरी पर आधारित राज की मांग उठाने वाले वो पहले महापुरूष थे। वे जाति पांति के बंधन से मुक्त समाज की व्यवस्था के पक्षधर थे। मुख्य अतिथि ने अगले जयंती तक सामाजिक भवन के चारों ओर आहता निर्माण करवाने की बात कही तथा संत रविदास जयंती के अवसर पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किये जाने हेतु प्रतिनिधिमंडल के साथ स्वयं माननीय मुख्यमंत्री से चर्चा करने का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम में अध्यक्षता कर रहे किशुन यदु ने कहा कि पिता रघु एवं माता करमा देवी के घर चौदहवीं सदी के उत्तरार्ध में बालक रविदास का जन्म हुआ। उन्हें सेवा की भावना अपने माता पिता से विरासत में प्राप्त हुई। रविवार के दिन पैदा होने के कारण उनका नाम रविदास रखा गया। संत रविदास का मानना था कि जाति से कोई बड़ा या छोटा नहीं होता अपितु अपने कर्म से ही मानव महान बनता है। वे जीवन पर्यन्त सामाजिक विषमताओं एवं जाति व्यवस्था के भेदभाव पर प्रहार करते रहे। परिश्रम से कमाई करना एवं परमार्थ से साधना करना उनके जीवन का प्रमुख कार्य रहा।
विशेष अतिथि डा.के.एल.टाण्डेकर ने कहा कि संत रविदास जी ने श्रम की महत्ता को प्रतिपादित किया। उन्होंने ऐसे समाज की परिकल्पना की जो छोटे बड़े के भेदभाव से मुक्त हो, अंधविश्वास, रूढ़ीवादिता, पाखण्ड से परे हो एवं जहॉ न्याय व समानता का राज हो। संत रविदास जी ने मानवतावादी समाज की स्थापना हेतु प्रयास किया। डॉ.टाण्डेकर ने संत रविदास जी की जयंती के अवसर पर एक दिन के सार्वजनिक अवकाश घोषित किये जाने हेतु राज्य शासन से मांग की।
विशेष अतिथि डॉ.एस.आर.कन्नौजे ने कहा कि संत रविदास जी एक सच्चे कर्मयोगी, त्यागी, युगपुरूष, विश्वशांति के अग्रदूत, राष्ट्रीय एकता के प्रचारक, धार्मिक आन्दोलन के प्रणेता, संत शिरोमणि रहे हैं। वे उच्च कोटि के संत थे। सभा को रामचरण खरे, सी.एल.चन्द्रवंशी, सिद्धार्थ चौरे, प्रशांत सुखदेवे ने भी संबोधित किया। सामाजिक बन्धुओं ने हर्षोल्लास के साथ नगर में रैली निकाली। इस अवसर पर नगर के साथ हि आसपास के क्षेत्रों से स्वजातीय बन्धुगण, विभिन्न समाज के प्रमुखजन, महिलाएॅ, नवयुवक साथी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इस समारोह में मुख्य रूप से पी.आर.झाडे़, डॉ. जी.पी.रात्रे, इठोवा चौहान, निर्मल खरे, योगराज जगने, आनंद भोन्डेकर, अनुसुईया जगने, शशिकला हठीले, पार्षद छेदैया, आशीष डोंगरे, एल.सी.मेश्राम, कांति फूले, माताभीख अनोखे, गांधीतनय टांडिया, जीवन भोन्डेकर, आर.पी.लान्झकर, मेवालाल, माधो टाण्डेकर, कन्हैया खरे, पुष्पा मोहबे, संतोषी तुरकने, रविता लकड़ा, नकुल मोहबे, रामप्रसाद खरे, शंकर तुरकने, प्रहलाद जगने, देवेन्द्र चौहान, संजय बरईकर, आनंद हठीले, शिशुपाल हठीले, रामभाऊ गायकवाड़, कन्हैया मोहबे, महेश मोहबे, संजय मोहबे, प्रतिमा वासनिक, भीवा टाण्डेकर सहित अन्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों के लिये रात्रिभोज की व्यवस्था की गई और यह कार्यक्रम कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए आयोजित किया गया। कार्यक्रम में प्रभावी मंच संचालन एवं अंत में आभार प्रदर्शन जिला रविदास समाज सेवा समिति राजनांदगॉव के महासचिव पी.आर.झाड़े ने किया।