रायपुर। प्रदेश के शासकीय अस्पतालों में छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कारपोरेशन (सीजीएमएससी) की तरफ से भेजा गया घटिया पोविडोन आयोडीन दवा का सैंपल सेंट्रल लेबोरेटरी कोलकाता में भी फेल हो चुका है। रिपोर्ट में राजफाश हुआ है कि सीजीएमएससी के अधिकारियों द्वारा मिलीभगत व भ्रष्टाचार से दवाएं बिना जांच के ही अस्पतालों में सप्लाई की गई थी। लेकिन विडंबना है कि लाखों मरीजों की जान से खेलने वालों पर अब भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
एंटीसेप्टिक दवा की गुणवत्ता की शिकायत पर हुई थी जांच
बता दें कि अस्पतालों से पोविडोन आयोडीन (एंटीसेप्टिक दवा) के गुणवत्ता को लेकर लगातार शिकायत मिलने पर औषधि विभाग ने आंबेडकर अस्पताल से सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा था। 26 फरवरी 2021 को आई रिपोर्ट में पता चला कि उसमें मूल दवा का कोई तत्व ही नहीं है यानी पूरी तरह से अमानक है। आनन-फानन में शासन स्तर पर पत्र जारी कर सभी सरकारी अस्पतालों से दवाओं के भेजे गए खेप को वापस मंगाया गया।
मानवाधिकार आयोग ने मांगा जवाब
विभागीय जांच में सामने आया कि सीजीएमएसी द्वारा हिमाचल प्रदेश के नालगढ़ स्थित एल्विस हेल्थ केयर कंपनी से टेंडर कर करोड़ों रुपये की दवा खरीदी की गई थी। दवा खरीदी से पहले उसके गुणवत्ता की जांच की जाती है, जो नहीं की गई। मामले को नईदुनिया ने चार मार्च 2021 को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसपर मानवाधिकार आयोग ने भी संज्ञान लेकर जवाब मांगा था।
औषधि विभाग की कार्रवाई
औषधि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मामले में रिपोर्ट आने के बाद एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है। चूंकि, सीजीएमएससी शासकीय संस्थान है इसलिए औषधि विभाग इसमें हाथ डालने से बच रहा है। अधिकारी मान रहे हैं कि यह सीजीएमएससी की गड़बड़ी है। इधर, सीजीएमएससी के अधिकारी कंपनी को ब्लैक लिस्ट करने की बात कह रहे हैं लेकिन अनियमितता पर मौन हैं।
करोड़ों की खरीदी, फाइलें गायब
अधिकारियों ने बताया कि इस दवा का उपयोग सर्जरी, घाव के जख्म समेत कई चिकित्सकीय उपचार में इंफेक्शन से बचाव के लिए किया जाता है। इसकी बड़े पैमाने पर अस्पतालों में खपत होती है। मामला उजागर होने के बाद 2000 लीटर से अधिक दवा वापस मंगाए गए थे। सूत्रों का दावा है कि लीपापोती करने खरीदी से संबंधित कई दस्तावेज भी अधिकारियों ने गायब कर दिए हैं।
घटिया दवा आपूर्ति दुर्भाग्यजनक
इलाज में उपयोगी प्रत्येक दवा का मामला संवेदनशील है। यह मरीजों के जीवन से जुड़ा है। घटिया दवा सप्लाई बेहद दुर्भाग्यजनक है। ऐसी गतिविधियां भाजपा शासनकाल से चल रही है। हमारी सरकार अधिकारियों के इस प्रवृत्ति पर अंकुश लगा रही। मैं मामले की जांच कराता हूं। सीजीएमएससी में हुए सभी भ्रष्टाचार की फाइलें खुलेंगी। और दोषियों पर कार्रवाई होगी।