आपराधिक मामला दर्ज करने हाई कोर्ट में होनी थी सुनवाई, दो दिन पहले अधिकारी का बीपी व शुगर बढ़ गया
बिलासपुर/राजनादगांव। न्यायालयीन आदेश की अवहेलना के आरोप में राजनादगांव जिला शिक्षाधिकारी एचआर सोम को दो मई को हाई कोर्ट में उपस्थित होना था। आपराधिक प्रकरण दर्ज करने हाई कोर्ट की सिंगल बेंच में सुनवाई होनी थी। सुनवाई के ठीक दो दिन पहले उनकी तबीयत बिगड़ गई। हाई बीपी व शुगर हो गया। कोर्ट के समक्ष वकील के माध्यम से चिकित्सकीय प्रमाण पत्र पेश करने मोहलत मांग ली है।
राजनादगांव जिला शिक्षाधिकारी पर आरोप है कि उन्होंने हाई कोर्ट के निर्देश का लगातार उल्लंघन कर रहे हैं। निर्देश के बाद भी याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर कार्रवाई नहीं की। याचिकाकर्ता ने जिला शिक्षाधिकारी सोम के विस्र्द्ध न्यायालयीन आदेश की अवहेलना करने का आरोप लगाते हुए अवमानना याचिका दायर कर दी है। मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने जिला शिक्षाधिकारी पर आरोप लगाते हुए कहा कि हाई कोर्ट के निर्देश पर अनुकंपा नियुक्ति के लिए अभ्यावेदन पेश करने के बाद भी कार्यालय से किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई है। इससे उनकी परेशानी बढ़ गई है। परिवार के सदस्यों को आर्थिक तंगी भी झेलनी पड़ रही है।
राजनादगांव जिले के ग्राम हरदी निवासी दाताराम वर्मा डोंगरगढ़ में प्रधान पाठक के पद पर पदस्थ थे। सेवाकाल के दौरान उनकी मृत्यु हो जाने पर पुत्र योगेंद्र वर्मा द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी, राजनांदगांव के समक्ष अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन दिया गया। डीईओ राजनांदगांव द्वारा इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि योगेंद्र वर्मा के बड़े भाई जुगल वर्मा डोंगरगढ़ ब्लाक में शिक्षाकर्मी के पद पर पदस्थ हैं। हाई कोर्ट ने जिला शिक्षाधिकारी के आदेश को निरस्त करते हुए याचिकाकर्ता द्वारा के प्रकरण की जांच करने और उनके द्वारा याचिका में कही गई बातें सही होने पर अनुकंपा नियुक्ति देने का आदेश दिया था।
अभ्यावेदन पर किसी तरह की कोई कार्रवाई ना होने पर योगेंद्र वर्मा ने वकील अभिषेक पांडेय के जरिए जिला शिक्षाधिकारी राजनादगांव के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की। नोटिस के बाद जिला शिक्षाधिकारी ने दस्तावेज पेश करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के पास कृषि भूमि है जो जीवनयापन के लिए पर्याप्त है। इसी आधार पर याचिकाकर्ता के आवेदन को निरस्त करने की जानकारी दी।
अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान जस्टिस पी सैम कोशी की नाराजगी उस वक्त बढ़ गई जब याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि जिला शिक्षाधिकारी ने नियमों की गलत व्याख्या कर हाई कोर्ट के स्पष्ट दिशा निर्देश की अवहेलना की है। नाराज कोर्ट ने आपराधिक प्रकरण (चार्ज फेम) दर्ज करने का निर्देश देने के साथ ही तिथि भी तय कर दी थी।