पेंड्री मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में अब ऐसे ऑपरेशन भी किए जा रहे हैं, जिसके लिए मरीजों को रायपुर, दुर्ग, भिलाई सहित अन्य राज्यों के अस्पताल तक दौड़ लगानी पड़ती थी। ऐसे ऑपरेशन के पीछे मरीजों को लाखों रुपए खर्च करने पड़ते थे। शारीरिक परेशानी के साथ आर्थिक रूप से समस्याओं से जूझना पड़ता था पर अब ऐसी दिक्कतें नहीं आ रहीं हैं। लोकल स्तर पर ही डॉक्टर क्रिटिकल केस हैंडल कर रहे हैं। गंभीर ऑपरेशन कर मरीजों की जान बचा रहे हैं।
एमसीएच के हड्डी रोग विभाग के डॉक्टरों ने हाल ही में रीड़ की हड्डी की परेशानी से जूझ रही महिला का सफल ऑपरेशन किया। महिला तीन माह से अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पा रही थी। कमर में इस कदर दर्द था कि महिला बेड से उठ नहीं पाती थी। हालांकि अब ऑपरेशन के बाद महिला खुद से चल, फिर रही है।
कमर में अब किसी तरह की परेशानी नहीं है। डॉक्टरों का कहना है कि प्राइवेट या फिर दूसरे अस्पताल में इस ऑपरेशन के पीछे चार से पांच लाख रुपए महिला के परिजनों को खर्च करने पड़ते पर सरकारी मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में सफल ऑपरेशन होने से गरीब परिवार को आर्थिक संकट से नहीं जूझना पड़ा।
बालोद जिले की रहने वाली यह महिला तीन माह से बेड पर थी, अब आसानी से चल, फिर रही
6 साल से कमर दर्द था हजारों रुपए खर्च कर चुके
हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर दीपक धृतलहरे ने बताया कि बालोद जिले के अर्जुननाला निवासी 42 वर्षीय संतोषी पति सोनू राम पांच से छह साल से कमर दर्द की तकलीफ से जूझ रही थी। 24 घंटे में कमर में दर्द रहता था। महिला के परिजन अन्य जगहों पर इलाज कराते रहे। इलाज में हजारों रुपए खर्च चुके थे।
कमर दर्द बढ़ते-बढ़ते दोनों पैरों तक पहुंच गया था। महिला तीन माह से चल नहीं पा रही थी। खड़े होने में दर्द बढ़ जा रहा था। एमसीएच में डॉक्टरों की टीम ने जांच करने के बाद ऑपरेशन करने का निर्णय लिया और सफलता मिली।
रायपुर से तत्काल मंगाए गए जरूरी उपकरण
हड़डी रोग विभाग के एचओडी डॉ. राजेश डूलानी ने मरीज के बिगड़ते हालत को देखते हुए ऑपरेशन यहीं करने का प्लान बनाया। डॉ धृतलहरे ने बताया कि सामान्य भाषा में इस ऑपरेशन को टिलिफ कहते हैं। समस्या यह थी कि इस ऑपरेशन के लिए यहां जरूरी उपकरण उपलब्ध नहीं थे पर अस्पताल प्रबंधन ने रायपुर से जरूरी उपकरण मंगा दिए।
इसके बाद रीड़ की हड्डी का सफल ऑपरेशन किया गया। दबी हुई नस को हटाया गया। स्थिति यह है कि अब महिला अपने पैरों पर खड़े हो रही है, चल फिर रही है और घरेलू काम कर पा रही है।
ऑपरेशन जरूरी हो गया था: डॉ. धृतलहरे
डॉक्टर ने बताया कि बाहर में इलाज कराकर थक चुके आखिरकार परिजन उक्त महिला को लेकर एमसीएच के हड्डी रोग विभाग पहंुचे। ओपीडी में चेकअप करने के बाद डिजीटल एक्स-रे कराने पर पता चला कि महिला की रीड़ की हड़डी की नस दब गई है।
डॉ धृतलहरे ने बताया कि स्थिति यह थी कि बिना सर्जरी ऑपरेशन के इस समस्या को दूर करना मुश्किल था। विडंबना यह थी कि एमसीएच के हड्डी रोग विभाग में इस तरह का ऑपरेशन पहले नहीं हुआ था। ऑपरेशन के बाद किसी तरह की समस्या नहीं हैे।