राजनांदगांव। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के विभाग संयोजक चिन्टू सोनकर ने एनएसयूआई के सभी आरोपों को निराधार बताते हुए, अपने गिरेबान में झांकने की सलाह दी है। एबीवीपी विभाग संयोजक चिन्टू सोनकर ने एनएसयूआई की पुरानी करतूतों को याद दिलाते हुए कहा कि, एनएसयूआई ने तत्कालीन जनभागीदारी अध्यक्ष को उनके पद से हटाने के लिए प्रतिरूप के रूप में कुत्ते को लेकर प्रदर्शन कर शिक्षा के इसी मंदिर का अपमान किया था, इसके एवज में पूर्व जनभागीदारी अध्यक्ष ने उन पर अनुसूचित जाति और जनजाति अपराध निवारण अधिनियम की धारा 3, 1, 10 के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी, और आज यही लोग हम पर झूठा और बेबुनियाद आरोप लगाकर अनुशासन की दुहाई दे रहे हैं। एनएसयूआई अगर भूल रही हो तो हम याद दिला दें कि, इन्होंने न तो शिक्षा के मंदिरों को छोड़ा है और न ही देवतुल्य चिकित्सकों को बख्शा है। आए दिन एनएसयूआई के पदाधिकारियों के द्वारा नशे की हालत में मारपीट और दुर्व्यवहार की खबरें देखने और सुनने को मिलती रहती हैं।
एबीवीपी कार्यकर्ता प्रदीप झा ने बताया कि एनएसयूआई के पूर्व दिग्विजय महाविद्यालय के छात्रसंघ पदाधिकारी पर कॉलेज की ही एक युवती से छेड़छाड़ और अभद्रता का घटनाक्रम भी लोगों के जेहन में आज भी याद है। जिसके चलते तत्कालिक प्राचार्य द्वारा उसे उसके छात्रसंघ के पद से कॉलेज द्वारा निष्कासित भी किया जा चुका है। ऐसे एनएसयूआई के कार्यकर्ता हमें सम्मान की पाठ न पढ़ाए।
एबीवीपी कार्यकर्ता आशीष सोरी ने कहा कि एनएसयूआई के जो कार्यकर्ता ने आज प्रेस कांफ्रेश ली और विपक्षों को नैतिकता का पाठ पढ़ाकर अपने ऊपर लगे आरोपों से बच रहे है ज्ञात हो कि पूर्व में जब एनएसयूआई जिला अध्यक्ष ने छात्रों से पैसा लेकर एडमिशन कराया करते थे जिसका विडियों भी पूर्व में वायरल हो चुका है और जिनके ऊपर महाविद्यालय में जांच समिति भी बन चुकी है जिसे सत्ता के दबाव में जांच कमेटी के निर्णय को बदला गया है, ये सत्ताधारी दल का दुरूपयोग ही है जो सच को दबा रहे है और आज हमें नैतिकता का पाठ पढ़ा रहे है। हम हमेशा छात्रहित का कार्य करते है और निरंतर करते रहेगे।
एबीवीपी कार्यकर्ता षनुध मिश्रा ने कहा कि दिग्विजय महाविद्यालय में हो रहे अनुशासनहिनता का कोई जिम्मेदार है तो वह है छात्रसंगठन कांग्रेस का ही है। हम हमेशा छात्रहित में कार्य करते है यदि एडमिशन में धाधली नहीं हुई है तो जांच से प्रशासन क्यों घबरा रहा है क्या एनएसयूआई एवं काग्रेस के दबाव में आकर एडमिशन दिया जा रहा है। एनएसयूआई की संस्कृति क्या है इससे सभी भली भांति परिचित हैं, किसी पर झूठा आरोप लगाने से पहले उन्हें एक बार खुद के गिरेबान में झांकना चाहिए।