राजनांदगांव, 14 जुलाई। राजनांदगांव शहर एवं जिले में कोरोना के केस लगातार बढ़ते जा रहे है कल...
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रायपुर. शहर के तेलीबांधा इलाके में एक युवक की मामूली बहस की वजह से हत्या कर दी गई।...
रायगढ़-उच्च शिक्षामंत्री व खरसिया विधायक उमेश पटेल ने अपने विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सरवानी, बरगढ़ और पलगढ़ा में 64.35 लाख...
जगदलपुर- कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी रजत बंसल द्वारा जिले में शिशु लिंगानुपात एवं लिंग चयन को नियंत्रित...
गरियाबंद -समूह की ताकत,एकता और दृढ़ विश्वास से जीवन को बदला जा सकता है। जो कार्य अकेले में असंभव जान पड़ता है उसे समूह के समर्थन और मार्गदर्शन से ही संभव बनाया जा सकता है। मजदूरी और अपने घर में काम करने वाली महिलाओं के लिए ज्यादा दूर की सोचना इसलिए भी संभव नहीं हो पाता, क्योंकि उनके पास संबल देने वाला कोई नहीं होता। जिले के छुरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम लोहझर की तोरण बाई चक्रधारी के साथ भी ऐसे ही कुछ हो रहा था। तभी उन्हें बिहान से जुड़ने का अवसर मिला। पूजा एकता स्वयं सहायता समूह से जुड़कर उनका मनोबल ऊंचा हुआ। पहले केवल घर का चैका-बर्तन और बाहर मजदूरी को ही अपनी दुनिया मानकर चली थी। उन्हें अपने भीतर छुपे हुनर का अंदाजा नहीं था। घर में पति युवराज चक्रधारी मिट्टी से परंपरागत बर्तन, मूर्ति और अन्य सजावटी वस्तुएं बनाते थे। तोरण केवल समय-समय पर हाथ बटाती थी। समूह में आने-जाने से उनकी अंदर की प्रतिभा उभर कर सामने आयी। गरीबी के कारण पति के इस कला को पहचान नहीं मिल पा रही थी। तभी समूह से 30 हजार रूपये का ऋण लेकर इस कला को आगे बढ़ाया। बाजार और सीजन के मांग के अनुरूप मिट्टी के कलात्मक वस्तुएं बनाना प्रारंभ किया और इसमें स्वयं तोरण बाई ने हाथ बटाया। आज पिछले 02 वर्षो से मिट्टी के बर्तन और मूर्ति की बिक्री से इनके आर्थिक स्थिति में काफी सुधार आया है। गर्मी के मौसम में मटका बेचकर 15-20 हजार रूपये का आय होता है। वहीं त्यौहार के मौसम में मूर्ति बनाकर भी 35-40 हजार रूपये का आय हो जाता है। अभी गणेश मूर्ति विक्रय हेतु छुरा में स्टाल भी लगाए हैं। जिससे अच्छी बिक्री की उम्मीद है। तोरण बाई बताती है कि वे समूह में आजीविका के साथ बचत करना भी सीख गई है। अब वे पेंट मशीन लेने की सोंच रहे है। इसे भी समूह के माध्यम से लूंगी। आय से उनके समृद्धि के द्वार खुल गए है। अब समूह में माताजी और बहू को भी जुड़ गये हैं। छुरा जनपद के सीईओ रूचि शर्मा ने बताया कि तोरण बाई को प्रशिक्षण देकर उसके कला में और निखार लाया जायेगा। बिहान के डी.पी.एम रमेश वर्मा बताते है कि उनके बनाये गए मिट्टी के वस्तुओं को और अधिक कलात्मक बनाकर बड़ा बाजार उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किया जा रहा है।
कवर्धा के ग्राम पंचायत बम्हनी में 10 एकड़ भूमि पर आजीविका केन्द्र के रूप में विकसित करते हुए स्थानीय...
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