September 4, 2026

kadwaghut

अर्द्धव्यस्क हाथी के स्वास्थ्य में आ रहा सुधार, चिकित्सक जता रहे जल्द स्वस्थ्य होने की संभावना कोरबा वनमंडल अंतर्गत कुदमुरा वनपरिक्षेत्र के ग्राम कठराडेरा में 14 जून से बीमार अर्द्धव्यस्क  नर हाथी के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार आ रहा है। बैंगलुरू से आए वाइल्ड लाइफ विशेषज्ञ डाॅक्टरों की देखरेख में हाथी को स्पेशल ट्रीटमेंट के साथ  विशेष डाईट दिया जा रहा है। हाथी के स्वास्थ्य की जानकारी लेने आज कोरबा कलेक्टर श्रीमती किरण कौशल भी मौके पर  पहुंची। यहां उन्होने वनमंडलाधिकारी सहित चिकित्सकों से हाथी के किए जा रहे ईलाज की पूरी जानकारी ली। श्रीमती कौशल ने दवाओं के साथ-साथ हाथी के लिए भोजन आदि की भी पर्याप्त व्यवस्था रखने के निर्देश वन अमले सहित  प्रशासनिक अधिकारियों को दिए है। उन्होने हाथी के ईलाज के लिए प्रशासन द्वारा सभी संभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन  दिया। इस दौरान अतिरिक्त जिलादण्डाधिकारी संजय अग्रवाल, डीएफओ एन. गुरूनाथन, डिप्टी कलेक्टर देवेन्द्र प्रधान, बैंगलुरू से आए वाइल्ड लाइफ विशेषज्ञ डाॅ. अरूण ए. शाह एवं डाॅ. प्रयाग एच. एस. भी मौजूद रहे।    डाॅ. अरूण शाह ने बताया कि हाथी के पेट में कीड़ो का संक्रमण है जिसके कारण वह कुछ खा पी  नहीं पा रहा था। हाथी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैय्या कराकर उसका उपचार किया जा रहा है। इस दौरान हाथी जल्दी रिकवर हो इसके लिए उसे दवाईयों के साथ ही विशेष आहार भी दिया  जा रहा है। हाथी के मलमूत्र, खून और गले की लार भी विशेष जांच के लिए रायपुर स्थित लैब भेजी गई है। जांच रिपोर्ट प्राप्त होते ही हाथी को विशेष दवाईयां देना शुरू किया जाएगा। डाॅ. अरूण शाह ने बताया कि लगातार हाथी हर दो घंटे में तापमान और सांस की गति को नापा जा रहा है। उसे बेहतर सुविधा और आराम के लिए हर 6 घंटे में करवट दिलाई जा रही है। हाथी के हड़डियों को नुकसान से बचाने के लिए विशेष दवाईयां तथा स्प्रे भी किए जा रहे है। डाॅक्टरोें ने उम्मीद जताई है कि कुछ ही दिनों में यह नर हाथी पूरी तरह ठीक हो जाएगा।     डीएफओ एन गुरूनाथन ने बताया कि यह हाथी 14 जून को अपने झूंड से बिछडकर कठराडेरा गांव में एक ग्रामीण के घर में घूस गया था और पेट के बल लेट गया था। प्रारंभिक तौर पर कोरबा में उपलब्ध विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों ने हाथी की जीवन रक्षा के जरूरी  प्राथमिक उपचार किया था। बाद में कलेक्टर व उच्चाधिकारियों के निर्देशन पर हाथी को रेस्क्यु करने के लिए कोरबा तथा बिलासपुर से वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट की टीम भी कठराडेरा पहुंची हुई है।आसपास के गांवों में अलर्ट जारी – कलेक्टर श्रीमती किरण कौशल ने गुरमा तथा आसपास के गांवो के निवासियो को हाथियों से सर्तक और सजग रहने की अपील की है। कलेक्टर ने कहा है कि अपने झूंड से बिछड़कर आए अर्द्धव्यस्क हाथी की खोज में हाथियों का झूंड गांव तक पहुंच सकता है। इसलिए सभी लोगो को हाथियों से सर्तक रहना चाहिए। अपने घरों में बहुत ज्यादा धान का भंडारण न करें। महुआ व शराब आदि न रखें, कटहल, केला आदि सब्जी तथा फलो को भी घरों से दूर रखें। श्रीमती कौशल ने वन अमले को लगातार ग्रामीण इलाकों में पेट्रोलिंग करने और पहले से ही  हाथियों से बचाव के सभी इंतजाम रखने के निर्देश दिए है। उन्होने जनपद पंचायत के सीईओ को कोटवारों के माध्यम से हाथियों से बचाव संबंधी मुनादी भी गांव-गांव में कराने के निर्देश दिए है। कलेक्टर ने हाथी की स्थिति और किए जा रहे ईलाज को देखते हुए उसके जल्द ही स्वस्थ्य होने की भी संभावना जताई है।
अम्बिकापुर,मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी एवं अस्पताल अधीक्षक डॉ. पीएस सिसोदिया ने बताया है कि संभागीय कोविड अस्पताल अम्बिकापुर से 6 कोरोना मरीजों के स्वस्थ होने पर डिस्चार्ज कर दी गई है। आज डिस्चार्ज किए गए मरीजों में सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखण्ड का एक मरीज शामिल हैै जिससे अब सरगुजा जिला कोरोना मरीज से मुक्त हो गया है। 17 जून की स्थिति में केवल बलरामपुर जिले के 42 मरीज कोविड अस्पताल अम्बिकापुर में भर्ती हैं जिनका उपचार जारी है। अब तक जिला अस्पताल में कुल 157 कोरोना मरीज भर्ती किये गए हैं जिनमें से 115 मरीज पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर घर लौट गए हैं। 17 जून को किसी भी भर्ती मरीज का सैंपल जांच रिपोर्ट के लिए नहीं भेजा गया है। कोविड वार्ड में भर्ती सभी मरीज एसिम्प्टोमेटिक हैं। चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टाफ द्वारा सतत् निगरानी कर उपचार किया जा रहा है। मरीजों का बी.पी पल्स एवं ऑक्सीजन सेचूरेशन एवं अन्य वाईटल्स सामान्य है। 2 मरीजों का उच्च रक्तचाप एवं मधुमेह नियंत्रण में है तथा उन्हें स्पेशल डाइट दिया जा रहा है।
सूरजपुर- क्रेडा विभाग द्वारा सूरजपुर जिले अंर्तगत ग्राम-केशवनगर एवं नयनपुर, विकासखण्ड और जिला-सूरजपुर के रेड़ नदी, जिसमें...
बलरामपुर,शासन की महत्वाकांक्षी नरवा, गरूवा, घुरूवा एवं बाड़ी योजना एक बहुआयामी प्रयास है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था तथा अवसंरचना के विकास के साथ ही ग्रामों को आजीविका केन्द्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। गोठान में सामुदायिक बाड़ी विकास के माध्यम से बाड़ियों में सब्जियां तथा उद्यानिकी फसलें लगाई जा रही है। एन.आर.एल.एम. की महिला स्व सहायता समूह की महिलाएं बाड़ी विकास के कार्यों में सक्रियता के साथ जुड़ी हुई हैं। जिला प्रशासन का भी प्रयास है कि महिलाओं को गोठान के माध्यम से आजीविका से जोड़कर लाभप्रद व्यवसायों में संलग्न किया जाए, ताकि उन्हें अच्छी आय प्राप्त हो। लागत, आय, परिश्रम और भूमि की अनुकूलता को देखते हुए विकासखण्ड शंकरगढ़ के गोठानों में अदरक की खेती करने का फैसला लिया गया है। महिलाओं को अदरक की खेती से जुड़ी सभी जानकारियां दी गई हैं, ताकि महिलाएं आसानी तथा सफलतापूर्वक अदरक की खेती कर पाएं।कृषि आधारित नवाचारों तथा महिलाओं को आर्थिक सक्षमता प्रदान करने के प्रयासों को बढ़ावा देने में कलेक्टर श्री श्याम धावड़े प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहे हैं। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हरीष एस. ने बताया कि शुरूआत से ही गोठान के माध्यम से महिलाओं को बाड़ी विकास कार्यक्रम से जोड़कर आजीविका प्रदान किया जा रहा है। इसी क्रम में शंकरगढ़ के गोठानों में अदरक की खेती करने के लिए महिलाओं को प्रोत्साहित किया गया। इस नई पहल में महिलाओं ने अपनी साकारात्मक रूचि दिखाई है। भूमि की अनुकूलता तथा अदरक की खेती से अच्छी आय को देखते हुए प्रशासन द्वारा महिलाओं को आवश्यक सामग्रियां उपलब्ध करवाई गई। शंकरगढ़ के मनकेपी के गोठान में पिछले वर्ष भी महिलाओं ने प्याज, मक्का, बरबट्टी एवं तरबूज की खेती कर अच्छा मुनाफा कमाया था। मनकेपी के राधा महिला स्व सहायता समूह की महिलाएं अदरक की खेती से जुड़ गई हैं। समूह की सदस्य चन्द्रकला बताती हैं कि खेत तैयार कर हमने अदरक की बुवाई कर दी है। महत्वपूर्ण बात यह है कि हमने खेतों में गोठान में तैयार जैविक खाद का उपयोग किया है, जिससे अच्छी पैदावार के साथ खेत की उर्वरकता बनी रहेगी तथा जैविक उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया कि सामान्य तौर पर अदरक की बीज बाजार में उपलब्ध नहीं हो पाती है, इसलिए हमने बैंक लिंकेज से प्राप्त राशि का उपयोग बीज खरीदने में किया था। बैंक लिंकेज से प्राप्त 24 हजार रूपये की राशि से 1.5 क्विंटल बीज की खरीदी की। अदरक की खेती के लिए प्राप्त जानकारियों को आधार बनाते हुए समूह की कुन्ती दीदी का कहना है कि 1.5 क्विंटल अदरक लगाने से हमें लगभग 6 क्विंटल अदरक प्राप्त होगा। जिससे लागत की तुलना में अच्छे अनुपात में पैदावार तथा आय प्राप्त होगी। हर कदम में प्रशासन का सहयोग हमें प्रोत्साहित किया है, जिससे हमें आगे बढ़ने में प्रेरणा मिली है।
    रायपुर- छत्तीसगढ़ कैडेर के भारतीय प्रशासनिक सेवा (2018) बैच के प्रोबेशनर अधिकारियों आज स्कूल शिक्षा की...