लोकेश शर्मा ✍️
राजनांदगांव। जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली और खाद्य विभाग की निष्क्रियता एक बार फिर सवालों के घेरे में है। मामला शहर के एक राशन दुकान से चावल को राइस मिल ले जाने का है, जहां दो दिन पहले मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने एक संदिग्ध वाहन को रोककर थाने लाया। वाहन चालक के पास चावल के संबंध में कोई वैध दस्तावेज मौजूद नहीं था।
हैरानी की बात यह रही कि जब पुलिस ने गाड़ी को जब्त कर थाने में खड़ा किया, तो उसमें लोड था चावल। लेकिन अगले दिन जब खाद्य विभाग की टीम जांच के लिए पहुंची, तो वही चावल ‘कनकी’ बन चुका था। Rajnandgaon: राशन दुकान से राइस मिल ले जाया जा रहा था चावल… पुलिस ने पकड़ी गाड़ी, खाद्य विभाग ने की अगले दिन जांच — चावल बना कनकी!
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इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि—
⏯️ चावल एक रात में कनकी कैसे बन गया?
इसके बाद जो हुआ, वह इस पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला खड़ा करता है। अगले दिन ड्राइवर ने बिल पेश कर दिया, और गाड़ी को बिना किसी कठोर कार्रवाई के छोड़ दिया गया। पूरे घटनाक्रम में अनेक अनसुलझे सवाल खड़े होते हैं, जिनका जवाब प्रशासनिक महकमे से अपेक्षित है साथ ही इस मामले में खाद्य विभाग मौन है जिसके चलते निम्नांकित प्रश्न खाद्य विभाग से खड़ा है, जिसका जवाब प्रशासन से जनता जानना चाहती है
*️⃣ *1. पुलिस की निगरानी में रखे गए चावल का रूपांतरण कनकी में कैसे हुआ? क्या यह छेड़छाड़ थाने में हुई या किसी मिलीभगत का नतीजा था?*
*️⃣ *2. खाद्य विभाग की टीम ने उसी दिन शाम को सामग्री की जांच क्यों नहीं की, जबकि वाहन पहले ही थाने में था? जांच में देरी के पीछे कारण क्या है?*
*️⃣ *3. जांच के दौरान न तो शिकायतकर्ता को बुलाया गया, न ही किसी स्वतंत्र गवाह को। यह प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है।*
*️⃣ *4. जिस राशन दुकान से चावल लाया गया, उस दुकान संचालक से कोई पूछताछ क्यों नहीं की गई?*
*️⃣ *5. ड्राइवर और उसके साथियों का बयान तक दर्ज नहीं किया गया। क्या विभाग ने जानबूझकर लापरवाही बरती?*
*️⃣ *6. सबसे अहम—क्या खाद्य विभाग के पास यह जांचने की सक्षम तकनीकी प्रक्रिया है कि जब्त चावल पीडीएस का है या नहीं? यदि हाँ, तो यह प्रक्रिया कितने समय में पूरी होती है और रिपोर्ट कहाँ है?*
*️⃣ *7. अगर चावल वाकई पीडीएस का था और उसे कनकी में तब्दील कर दिया गया, तो यह सीधे तौर पर सरकारी अनाज के दुरुपयोग और खाद्य घोटाले की श्रेणी में आता है।*
इन तमाम सवालों के बीच प्रशासनिक चुप्पी और गाड़ी छोड़ने में दिखाई गई जल्दबाज़ी, पूरे प्रकरण को संदेहास्पद बना रही है। सूत्रों की मानें तो मामले में राजनीतिक दबाव और लेन-देन की भी आशंका जताई जा रही है?
यह महज़ एक वाहन पकड़ने का मामला नहीं, बल्कि पीडीएस सिस्टम से जुड़े संभावित भ्रष्टाचार और मिलीभगत की परतें खोलने वाला गंभीर प्रकरण है, जिसकी निष्पक्ष जांच समय की मांग है।