राजनांदगांव। शहर में स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए टीम कभी भी दस्तक दे सकती है। इसको लेकर शहर में नगर निगम प्रशासन ने सफाई अभियान की शुरुआत तो कर दी है, लेकिन पटरी से उतरी सफाई व्यवस्था को वापस पर पटरी पर लाने निगम के सफाई कर्मियों को नए सिरे से ही सफाई करनी पड़ रही है।
शहर को स्वच्छ रखने और कचरों को संग्रहित करने के लिए निगम प्रशासन ने स्वच्छता के नाम पर लाखों रुपये खर्च किया है। शहरभर में डस्टबिन लगाए गए थे, जो डस्टबिन कबाड़ में फेंक दिए गए हैं। वहीं कचरा अब सड़कों पर आ गया है। जबकि निगम सड़कों से कचरों के मुक्कड़ को खत्म करने डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण करा रहा है। इसके बाद भी कचरों का ढेर सड़क पर दिख रहा है। अगर ऐसी स्थिति रही तो इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग में हमारा शहर नबंर वन कैसे बन पाएगा।
कागजों में बन रहा स्वच्छ शहर :
शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए नगर निगम प्रशासन कागजों में ही प्लान तैयार कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। शहर में सफाई व्यवस्था बदहाल स्थिति में है। जगह-जगह सड़क किनारे कचरों का ढेर लगना फिर से शुरू हो गया है। यही कचरों सड़कों पर भी फैल रहा है। बड़ी बात यह है कि शहर की सड़कों से कचरों को हटाने के लिए ही निगम प्रशासन ने हर घर हरा-नीला रंग के डस्टबिन बांटे थे।
इसमें निगम ने लाखों रुपये खर्च तक किया था, ताकि डोर-टू-डोरा कचरा संग्रहण के लिए लोग घरों के गीला और सूखे कचरों को संग्रहित कर रख सकें। लेकिन लोगों की लापरवाही निगम प्रशासन द्वारा कागजों में बनाए जा रहे प्लान पर भी पानी फेर रही है।
जागरूकता नहीं दिखा रहे शहरवासी : स्वच्छ शहर के लिए निगम प्रशासन जागरूकता अभियान तक चला रही है। शहर में दीवार लेखन, चित्रकला व पेंटिंग कर भी लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया गया है, लेकिन लोग जागरूकता नहीं दिखा रहे हैं।