बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर ब्लाक के शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला बसंतपुर के प्रभारी प्राचार्य राजेंद्र देवांगन की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कलेक्टर बलरामपुर के आदेश को रद कर दिया है। कलेक्टर ने याचिकाकर्ता व्याख्याता के खिलाफ निलंबन आदेश जारी कर दिया था। प्रभारी प्राचार्य राजेंद्र देवांगन ने वकील मतीन सिद्दिकी, दीक्षा गौराहा और वकार नैयर के जरिए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर कलेक्टर के आदेश को चुनौती दी थी। याचिका के अनुसार वे लोक शिक्षण संचालनालय के कर्मचारी हैं।
कलेक्टर को इस विभाग में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। नियुक्ति के समय उनकी सेवाएं आदिम विकास विभाग के कमिश्नर द्वारा शासित होती थी। इसी प्रकार जुलाई 2019 में लोक शिक्षण के वित्त नियंत्रक ने एक आदेश जारी करते हुए लिखा था कि स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन हो चुके व्याख्याता द्वितीय श्रेणी के राजपत्रित अधिकारी हैं। इसलिए उनके खिलाफ आदेश करने या निलंबन करने की क्षेत्राधिकारिता जिला कलेकटर को नहीं होगी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सिद्दीकी ने कोर्ट के सामने पैरवी करते हुए कहा कि किसी भी कर्मचारी या अधिकारी की सेवाओं को निलंबित करने का क्षेत्राधिकार उसके नियोक्ता के अधीनस्थ प्राधिकारी या प्राधिकरण को नहीं होता।राज्य के सिविल सेवा के वर्गीकरण नियम 1966 के नियम-9 के तारतम्य में यह उल्लेख है कि कलेक्टर केवल तृतीय श्रेणी और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों या अधिकारियों की सेवाओं के खिलाफ ही कोई अनुकूल या प्रतिकूल आदेश जारी कर सकता है। द्वितीय श्रेणी के लिए नहीं । याचिकाकर्ता द्वितीय श्रेणी के राजपत्रित अधिकारी हैं। मामले की सुनवाई जस्टिस एनके व्यास की सिंगल बेंच में हुई। प्रकरण की सुनवाई के बाद जस्टिस व्यास ने याचिकाकर्ता प्रभारी प्राचार्य को राहत देते हुए कलेक्टर द्वारा जारी निलंबन आदेश को रद कर दिया है।