ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे पूरा हो गया है। वाराणसी के श्रृंगार गौरी ज्ञानवापी मामले में आज सर्वे का तीसरा दिन है। आज बचे हुए भाग की वीडियोग्राफी की गई। सर्वे के दौरान ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने में शिवलिंग मिला है। कोर्ट ने शिवलिंग मिलने वाली जगह को सील करने के आदेश दिए है।
ज्ञानवापी मस्जिद के इलाके की सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ को सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई। बता दें, कोर्ट ने आदेश जारी कर कहा, प्रार्थनापत्र 78 ग स्वीकार किया जाता है । जिला मजिस्ट्रेट , वाराणसी को आदेशित किया जाता है कि जिस स्थान पर शिवलिंग प्राप्त हुआ है , उस स्थान को तत्काल प्रभाव से सील कर दें और सील किये गए स्थान पर किसी भी व्यक्ति का प्रवेश वर्जित किया जाता है ।
जिला मजिस्ट्रेट , वाराणसी , पुलिस कमिश्नर , पुलिस कमिश्नरेट , वाराणसी तथा सी ० आर ० पी ० एफ ० , कमाण्डेन्ट , वाराणसी को आदेशित किया जाता है कि जिस स्थान को सील किया गया है , उस स्थान को संरक्षित एवं सुरक्षित रखने की पूर्णतः व्यक्तिगत जिम्मेदारी उपरोक्त समस्त अधिकारियों की व्यक्तिगत रूप से मानी जाएगी। उपरोक्त सील किये गये स्थान के बाबत स्थानीय
बता दें कल सुप्रीम कोर्ट में भी ज्ञानवापी मामले की सुनवाई होगी। मस्जिद कमेटी ने सर्वे को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। जस्टिस चंद्रचूड़ की बेंच मामले की सुनवाई करेगी। जस्टिस चंद्रचूड़, जस्टिस PS नरसिंहा की पीठ सुनवाई करेगी।

जानिए आगे क्या होगा
मामले में अब वाराणसी की जिला अदालत में 17 मई को सुनवाई होगी। इसी दिन सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई होगा है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट में जिस सर्वे को रोकने की याचिका लगाई थी, वह काम पूरा हो चुका है। ऐसे में यह सुनवाई होगी या नहीं, इस पर सवाल है।ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में रविवार को एडवोकेट कमिश्नर की कार्यवाही सुबह ठीक आठ बजे शुरू हुई। उस समय तक धूप तीखी हो चुकी थी। गर्मी ज्यादा बढ़े उससे पहले ही मस्जिद परिसर के खुले हिस्से में और गुबंद की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी करना तय हुआ। इबादत की जगह पर सभी लोग नंगे पैर दाखिल हुए। गुबंद के अंदर की संरचना को ज्यादा से ज्यादा करीब से देखने की कोशिश थी। सीढ़ी संकरी होती चली गई है और ऊपर सांस लेना भी मुश्किल था। चर्चा रही कि गुंबद की बनावट हर किसी को चौंका रही थी। इसलिए हर कोई उसे देखना चाहता था। थोड़ा वक्त तो लगा लेकिन कई महत्वपूर्ण तथ्यों को समेटकर टीम सीढ़ियों से चढ़कर ऊपर छत तक पहुंची। तब तक तेज धूप से छत तपने लगी थी और नंगे पैर चलना मुश्किल हो रहा था। इसके बाद फोटोग्राफर व वीडियोग्राफर के साथ सभी ने कोने-कोने तक जाकर पूरी संरचना देखी।इसके बाद नमाज वाली जगह पर हालनुमा बड़े कमरे की छत से लेकर फर्श की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी हुई। यहां भी चौकाने वाली कई चीजें थीं। दीवारों और सीलिंग पर बनी कई आकृतियां ऐसी थीं जो मंदिर पक्ष के वकीलों को रुककर उसकी फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी कराने के लिए मजबूर कर रही थीं। दीवारें और खंभों पर खास नजर रही। जैसे-जैसे कार्यवाही बढ़ रही थी, उत्सुकता भी बढ़ती जा रही थी। 100 से ज्यादा फोटो यहां खींचे गए। वीडियोग्राफी भी लंबे समय तक चली।
इसके बाद पूरी टीम एक बार फिर तहखाने की ओर चल पड़ी। घनघोर अंधेरा होने के कारण सर्च लाइट का इंतजाम किया गया। बंद जगह में गर्मी की वजह से सभी तर-बतर होते रहे। विषैले जीवों का डर भी था। यहां आने में विशेष रुचि मंदिर पक्ष के लोगों की थी। एक दिन पहले दीवारों पर मिली तमाम आकृतियों से उन्हें और भी कुछ हासिल होने की उम्मीद थी। एक बार फिर दीवारों, खंभों पर निगाह डाली गई। बहुत कुछ ऐसा था, जिसे कैमरों में कैद कराना जरूरी था।
टीम परिसर में मौजूद तालाब के पास भी गई। एक पक्ष चाहता था कि पूरा पानी निकालकर तलाब की फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी हो, हालांकि ऐसा हो नहीं सका। कार्यवाही के दौरान कुछ लोग एडवोकेट कमिश्नर की नाराजगी का शिकार भी हुए। उन्हें कुछ वक्त के लिए कार्यवाही से दूर कर दिया गया। तय समय दोपहर 12 बजे कार्यवाही बंद की गई।