राजनांदगांव. शासकीय कमला देवी राठी महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय राजनांदगांव के स्नातकोत्तर भूगोल विभाग द्वारा संस्था प्राचार्य डॉ. आलोक मिश्रा के प्रमुख निर्देशन में राज्य स्थापना दिवस के महत्तम परिप्रेक्ष्य में विशेष व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित किया गया। विभागाध्यक्ष प्रो. कृष्ण कुमार द्विवेदी ने विशेष व्याख्यान के अंतर्गत विषयक छात्राओं को बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य एक विशिष्ट आदिवासी संस्कृति एवं सभ्यता के लिए विश्व प्रसिद्ध प्राकृतिक सौन्दर्यशाली भूखण्ड है। परम पुण्यभूमि भारत का दसवां बड़ा राज्य छत्तीसगढ़ में प्रमुख रूप से 42 जनजातिय समूह निवास करते हैं। प्रदेश की विशेष भू-भौतिक परिस्थितियों के तीन प्रमुख क्षेत्रों उत्तर में सरगुजा, रायगढ़, बिलासपुर, मध्य में धमतरी, रायपुर, महासमुंद, दुर्ग, राजनांदगांव, कवर्धा तथा दक्षिण में बस्तर, दंतेवाड़ा, नारायपुर, बीजापुर के जिलों में मुख्य रूप से उराव, कोरवा, कोल, कमार, पनिका, कंवर, बिझवार, भतरा, गोंड, हल्बा, सौंता, सौनता हल्बी, परजा, पोलम गढाबा, सहरिया, मडिय़ा, माडि़ंया आदि के सैकड़ों उपजनजाति समूह निवास करते हैं। आगे प्राध्यापक द्विवेदी ने उल्लेखनीय रूप से बताया कि पहाड़ी, पठारीय इलाकों, सघन वन क्षेत्रों में प्रमुख रूप से निवासित ये जनजातियां अनुपम जनजातिय संस्कृतिक पर्यावरण का निर्माण करती हैं विशेष रूप से इनकी अनूठी पर्व-परंपराएं, भाषा-बोली, गीत-गान, नाच-नृत्य शैलियां मन मोह लेती है। इनके व्यवसाय प्राकृतिक कृषि, पशुपालन, वनोपजों का संग्रहण, मिट्टी-बांस, काष्ट-धातु, शिल्प, चटकीलें रंग-बिरंगे परिधान, आभूषण-गहनें, संपूर्ण देश-धरती में अद्वितीय पहचान बनाते हैं। वस्तुत: हमारा नैसर्गिक सौंदर्य का न्यारा नवप्रदेश छत्तीसगढ़ आदिवासी जनजाति संस्कृति का प्रादर्श प्रतिनिधि प्रदेश है। स्थापना दिवस के शुभमंगल अवसर पर सर्व जन-जन को इसके निरंतर संरक्षण-संवर्धन और समृद्धि-विकास में प्रत्यक्ष सहभागिता के लिए सदैव दृढ़ संकल्पित रहना चाहिए। यही स्थापना दिवस का सार्थक श्रेयस्कर संदेश होगा। इस अवसर पर उपस्थित छात्राओं ने जानकारी परक प्रश्नोत्तरी के माध्यम से व्याख्यान कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता की।