डोंगरगढ़ के जंगल में घूम रहा बाघ कैमरे में कैद नहीं हो सका है। जिस हिस्से में बाघ के पदचिन्ह मिले थे, वहां दो ट्रैप कैमरे लगाए गए थे, लेकिन अब तक इस कैमरे की जद में बाघ नहीं आया है। हालांकि वनकर्मियों को बाघ के मूवमेंट पर नजर रखने की जिम्मेदारी दी गई है।
संभावना है कि बाघ जिस हिस्से से इलाके में दाखिल हुआ है, उसी दिशा में लौट गया। दरअसल बाघ की मौजूदगी के बाद डोंगरढ़ वनपरिक्षेत्र के जंगल में अब तक कोई बड़े शिकार की सुराग नहीं मिला है। आमतौर पर बाघ नीलगाय, गाय या दूसरे जानवरों को अपना शिकार बनाते हैं। जिसका अवशेष देखकर बाघ या तेंदुए का मूवमेंट वन अमला पता करता है। लेकिन इस हिस्से में शिकार का कोई अवशेष नहीं मिला है। वन विभाग की टीम लगातार निगरानी कर रही है। वहीं गांवों में अलर्ट भी जारी किया गया है।