राजनांदगांव । लखोली वार्ड क्रमांक 36 संजय नगर में संत शिरोमणि रविदास जी की जयंती बड़ी धूमधाम से मनाई गई। लखोली वार्ड क्रमांक 36 के पार्षद प्रतिनिधि व भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश मंत्री आशीष डोंगरे ने बताया कि संजय नगर में संत शिरोमणि रविदास महाराज जी की मंदिर विस्थापित है जयंती के दिन सुबह से ही मंदिर की साफ सफाई के साथ रविदास जी की मूर्ति को स्नान कराकर मंदिर के सामने सुंदर रंगोली बनाकर विशेष प्रकार से पूजा अर्चना की जाती है। संत शिरोमणि रविदास महाराज जी जयंती के दिन मंदिर के समीप समाज के लोग सहित बड़ी संख्या में वार्डवासी उपस्थित थे।
श्री डोंगरे ने अपने उद्बोधन में कहा कि संत रविदास जी का जन्म यूपी के वाराणसी में 16 फरवरी 1398 को हुआ था। संत रविदास जी का जन्म माघ पूर्णिमा को हुआ था। इसी कारण उनकी जयंती माघ पूर्णिमा को मनाई जाती है। उन्होंने दोहों और उपदेशों के माध्यम से जाति आधारित सामाजिक भेदभाव के खिलाफ संदेश दिया। संत रविदास जी के पिता का नाम संतोष दास और माता जी का नाम कलसा देवी था। जिस दिन रविदास जी का जन्म हुआ उस दिन रविवार था। इस कारण उन्हें रविदास कहा गया। संत रविदास जी को ऊंच-नींच, छुआछूत, जात-पात का भेदभाव देखने को मिला। संत रविदास जी ने समाज में व्याप्त बुराईयों जैसे वर्ण व्यवस्था, छुआछूत और ब्राह्मणवाद , पाखण्ड पूजा के विरोध में अपना स्वर प्रखर किया है। वे भक्ति आंदोलन के एक प्रसिद्ध संत थे। उनके भक्ति गीतों और छंदों ने भक्ति आंदोलन पर स्थायी प्रभाव डाला। संत रविदास ने देश में फैले ऊंच-नीच के भेदभाव और जाति-पात की बुराईयों को दूर करते हुए भक्ति भावना से पूरे समाज को एकता के सूत्र में बांधने का काम किया था। मन चंगा तो कठौती में गंगा, यह वाक्य तो आपने सुना ही होगा। इस वाक्य को संत शिरोमणि रविदास जी के द्वारा कहा गया है। वे जात-पात के विरोधी थे। इसलिए उन्होंने लिखा, जाति-जाति में जाति हैं, जो केतन के पात, रैदास मनुष ना जुड़ सके जब तक जाति न जात।