नगर का गौरव व नगर की एकमात्र तीन दशकों से संचालित शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला इस नए शैक्षणिक सत्र से बंद हो जाएगी। इस स्कूल में शासकीय स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी स्कूल प्रारंभ होने से यह स्कूल को बंद किया जा रहा है। इस स्कूल के प्राचार्य ने सूचना पटल में सूचना जारी कर दिया है कि नए सत्र में किसी भी कक्षा में छात्राओं को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इधर शाला के बंद हो जाने से इस शाला में चौकी नगर सहित आसपास गांवों के छात्राओं को हाईस्कूल व हायर सेकेंडरी की पढ़ाई के लिए निजी स्कूलों में प्रवेश लेना पड़ेगा या फिर नगर की छात्राओं को बालक स्कूल मेरेगांव में प्रवेश लेकर बालकों के साथ पढ़ाई करनी पड़ेगी।
इधर कन्या स्कूल में स्वीपर का काम करने वाली शकुन बाई अपने सात महीने का मानदेय प्राप्त करने के लिए स्कूल के प्राचार्य व शिक्षकों सहित जनप्रतिनिधियों का चक्कर काट रही है लेकिन उसे मानदेय नहीं मिल पा रहा है। अब इधर स्कूल ही बंद हो जाने से उसकी नौकरी भी छीन गई है और मानदेय मिल पाना भी खटाई में पड़ गया है। नगर के वार्ड 7 निवासी शकुन बाई ने स्थानीय विधायक छन्नी चंदू साहू से मिलकर मानदेय दिलाने की मांग की है। शिकायतकर्ता ने बताया कि स्कूल को समय पर आबंटन मिलने के बाद भी मानदेय का भुगतान नहीं किया गया। अब स्कूल बंद हो जाने का हवाला देकर काम से भी निकाल दिया गया तथा मानदेय के भुगतान के लिए भी बहानेबाजी की जा रही है।
प्रवेश के लिए भटक रही हैं छात्राएं: नगर की एक मात्र कन्या स्कूल वर्ष 1988 से संचालित है। इस स्कूल में प्रति वर्ष आठ सौ छात्राएं हाईस्कूल व हायर सेकेंडरी की पढ़ाई करती हैं। यहां अंबागढ़ चौकी नगर के अलावा हाथीकन्हार, केकतीटोला, सोनसायटोला, धानापायली, सेम्हरबांधा, सिरमुंदा, बोईरडीह, सांगली, सिर्राभाठा, कचकोहडो, मालडोंगरी, केसला सहित अन्य कई गांवों की छात्राएं पढ़ाई करती है। शासन ने इस वर्ष इस स्कूल काे बंद कर दिया है। स्कूल के प्राचार्य ने स्कूल में नवमी सहित अन्य कक्षाओं के लिए नए छात्राओं के प्रवेश पर रोक लगा दिया है। अब स्कूल के बंद हो जाने से नगर सहित आसपास गांवों के ग्रामीण अपनी बेटियों को हाईस्कूल व हायर सेकेंडरी में प्रवेश दिलाने के लिए भटक रहे हैं। अब इन पालकों को मजबूरी में निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाना पड़ेगा या फिर मजबूरी में बालक स्कूल मेरेगांव में लड़कों के साथ पढ़ाई करनी पड़ेगी।
उच्चाधिकारियों को जानकारी दी गई: बीईओ: बीईओ एस के धीवर ने कहा कि स्थानीय नागरिकों द्वारा कन्या स्कूल को बंद नहीं किए जाने की मांग की गई है, उच्चाधिकारियों को जानकारी दी गई है।
लगभग 18 शिक्षकों को अन्य स्कूलों में किया पदस्थ
कन्या स्कूल में इस वर्ष से नए छात्राओं को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। जानकारी के अनुसार कन्या स्कूल को बंद किया जा रहा है और इस संस्था में पदस्थ शिक्षकों को अन्यत्र शाला में पदस्थ कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि डीईओ ने इस कन्या स्कूल में कार्यरत डेढ़ दर्जन शिक्षकों को ब्लॉक के अन्य स्कूलों में पदस्थ कर दिया है। अब इन शिक्षकों को नए स्थान से वेतन प्राप्त होगा। वर्षभर इस बात की चर्चाएं थी कि इस शाला में हिंदी माध्यम का स्वामी आत्मानंद स्कूल संचालित होगी। पढ़ाई दो पाली में होगी और अंग्रेजी व हिंदी माध्यम शालाएं एक ही छत के नीचे संचालित होगी। लेकिन नए निर्णय के बाद अब कन्या स्कूल ही बंद हो गया है। इससे यहां कार्यरत शिक्षक भी परेशान हैं। इधर नई व्यवस्था से पालकों के समक्ष भी समस्या हो गई है।
तीन किलोमीटर दूर पड़ेगा स्कूल, बढ़ेगी मुश्किलें
नगर में स्कूल शिक्षा विभाग की विशेष व संभागीय संस्था कन्या क्रीड़ा परिसर भी तीन दशक से संचालित है। कन्या क्रीड़ा परिसर में खेल के क्षेत्र में प्रतिभावान छात्राओं को योग्यता के आधार पर प्रवेश दिया जाता है। इस संस्था की छात्राएं कन्या स्कूल में प्रवेश लेकर पढ़ाई करती थीं। क्योंकि कन्या क्रीड़ा परिसर में खेल की गतिविधियों संचालित होती है। इन छात्राओं के लिए शासन ने कन्या स्कूल में पढ़ाई की व्यवस्थाएं की थी, लेकिन अब कन्या स्कूल बंद हो जाने से क्रीड़ा परिसर की भी छात्राओं को पढ़ाई के लिए शासकीय बालक स्कूल मेरेगांव में प्रवेश लेना पड़ेगा। यदि एेसा हुआ तो क्रीड़ा परिसर की छात्राओं को पढ़ाई के लिए तीन किमी. दूर मेरेगांव आना-जाना पड़ेगा। क्योंकि यहां पर वाहन की सुविधा नहीं है। इससे छात्राओं को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।