भू-अभिलेख विभाग में मौज : अटैच तहसीलदार और पटवारी कर रहे आराम की नौकरी, काम का लगा अंबार, परेशान हो रही जनतामोहित पांचालइंदौर। सजा में भी मजा कैसे लिया जाए, ये बात सरकारी अफसरों से सीखना चाहिए। नाराजगी के चलते कलेक्टर ने तहसीलदार से लेकर पटवारी तक करीब दो दर्जन लोगों को भू-अभिलेख विभाग में अटैच कर दिया था। जहां पर कोई काम नहीं है और वे मस्ती मार रहे हैं। बड़ी बात ये है कि सभी की तनख्वाह 50 हजार रुपए से अधिक है।पूर्व कलेक्टर मनीष सिंह के काम करने का अंदाज अलग था। एसडीएम स्तर के अधिकारी से नाराज हुए तो उससे एसडीओ पद लेकर जाति प्रमाण-पत्र बनाने की जिम्मेदारी सौंप देते थे। तहसीलदार से लेकर पटवारी पर गाज गिरी तो वह सीधे भू-अभिलेख विभाग पहुंचा दिया जाता था। वहीं, अन्य विभाग के अफसरों को निर्वाचन में भेज दिया जाता था। मजेदार बात ये है कि दोनों ही जगहों पर अधिकारियों का जमघट लगा हुआ है।भू-अभिलेख विभाग में ऐसे सजायाफ्ता लोगों की संख्या दो दर्जन से अधिक है, जो सजा को मजा में बदलकर मस्ती छान रहे हैं। किसी के पास कुछ भी काम नहीं है। सुबह ऑफिस पहुंचकर दिनभर इधर उधर घूमते रहते हैं और शाम को समय पर घर रवाना हो जाते हैं। एक तरह से सभी की शाही नौकरी चल रही है। चौंकाने वाली बात ये है कि पटवारी से लेकर तहसीलदार तक की तनख्वाह 50 हजार रुपए से अधिक है।
मतलब सरकार के खजाने से हर माह इन्हें 12 लाख से अधिक की तनख्वाह दी जा रही है और कोई काम नहीं लिया जा रहा। स्थिति ये है कि भू अभिलेख में अटैच कोई भी किसी अफसर को फिर से काम के लिए नहीं बोल रहे हैं। उन्हें मालूम है कि फिर से फील्ड में भेजा गया तो दिन-रात जुटना पड़ेगा। यहां पर बिना कुछ करे तनख्वाह मिल रही है।
परेशान हो रहे पटवारीइंदौर में नौ तहसील हैं, जिसमें पटवारियों की संख्या पहले ही कम है। राऊ, कनाडिय़ा और मल्हारगंज में तो बहुत कमी है और अन्य जगह भी थोड़े हैं, लेकिन पूरे नहीं हैं। ऐसे में एक-एक पटवारी को दो-दो और तीन-तीन हलकों का चार्ज दिया गया है। ज्यादा काम होने की वजह से खासे परेशान हैं और समय पर काम पूरा नहीं करने पर जनता और अफसरों के कोपभाजन बन रहे हैं।खुले हुए हैं कई कामसरकार की घोषणा के अनुरूप जिला प्रशासन के पास कई प्रकार के काम हैं। जनसेवा अभियान चल रहा है। मुख्यमंत्री स्वामित्व योजना में पट्टे वितरण का कार्यक्रम चल रहा है। निर्वाचन का काम अलग चल रहा है तो किसानों का काम बढ़ा है। ऐसे में एक-एक पटवारी के पास तीन-तीन हलकों का काम मिला हुआ है, जो खुद का काम ही ठीक से पूरा नहीं कर पा रहे हैं तो इन योजना पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं।
ये है भू-अभिलेख का स्टाफ- तहसीलदार :- बजरंग बहादुरसिंह व रितेश जोशी- अधीक्षक सहायक :- श्वेता झामरा, अनिल मेहता, गौरव निरंकारी व रेशम गवली- पटवारी :- नेहा गुप्ता, माधुरी पत्की, प्रबल प्रतापसिंह, पारुल त्रिपाठी, अनिता कुंभकार, संदीप दुबे, प्रवीण पाटीदार, दीपक मिश्रा, शिवानी चौहान, किशन पुरोहित, सुमित शर्मा, कपिल आकले, सुनील मंडलोई, अमरसिंह मंडलोई, दीपक कोलते और सचिन मीणा।