रायपुर । ऐसा पहली बार नहीं है, जब सीमेंट की कीमतों में इस तरह अप्रैल महीने में बढ़ोतरी देखी गई हो। इससे पहले भी सीमेंट की कीमतों में बढ़ोतरी हो चुकी है। या यूं कहें कि हर साल गर्मियों की शुरूआत के साथ ही कीमतों में बढ़ोतरी का खेल शुरू होता है। बाजार सूत्रों का कहना है कि इसे कंपनियों का कर्टेल कहना गलत नहीं होगा, क्योंकि सीमेंट कंपनियों ने बीते साल बरसात के बाद इसी तरह कीमतों में अचानक बढ़ोतरी कर दी थी। अब एक बार फिर यह स्थिति निर्मित हो रही है। सूत्रों का कहना है कि इससे बाजार पूरी तरह बैठ जाएगा। मार्केट में वैसे भी महंगाई का आलम है।
कीमतें पहले- 255 से 280 रुपये
कीमतें अब- 280 से 340 रुपये
इजाफा: 30 से 50 रुपये तक
सीमेंट उत्पादन पर एक नजर
प्रति महीने उत्पादन- लगभग 60 से 70 लाख मीट्रिक टन
देश भर में कुल उत्पादन की हिस्सेदारी-20 से 25 फीसदी
छत्तीसगढ़ से इन राज्यों में निर्यात- महाराष्ट्र, झारखंड, ओड़िशा, उत्तर प्रदेश, पं. बंगाल, मध्य प्रदेश आदि।
इनमें से कई कंपनियों के दूसरे राज्यों में भी प्लांट हैं। ऐसी कंपनियां छत्तीसगढ़ से कच्चा माल उठाकर सीधे दूसरे राज्यों के अपने प्लांट को सप्लाई कर देती हैं। इस तरह से ये यहां केवल कच्चे माल की ही रायल्टी पटाते हैं। जबकि इसी कच्चे माल से इनके दूसरे संयंत्रों में सीमेंट बनता है। जिसका पूरा राजस्व वहां की राज्य सरकार उठा ले जाती है। बलौदाबाजार क्षेत्र में इस बात को लेकर स्थानीय लोगों ने कई बार विरोध किया, पर कभी बलपूर्वक तो कभी प्रलोभन देकर उन्हें शांत करा दिया जाता है।
छत्तीसगढ़ में चूना पत्थर की बहुलता है। यही कारण है कि यहां सीमेंट के कुल 13 बड़े संयंत्र लगे हुए हैं। इसमें अल्ट्राटेक, अंबुजा, डबल बुल, श्री सीमेंट, लाफार्ज, जेके लक्ष्मी, इमामी, एसीसी, बिरला गोल्ड आदि शामिल हैं। बलौदाबाजार-भाटापारा में ही सीमेंट कंपनियों की 9 फैक्ट्रियां हैं। दुर्ग-भिलाई में कंपनियों का उत्पादन जारी है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि छत्तीसगढ़ के खनिज संसाधानों का उपयोग करने के बाद कंपनियां राहत देने के बजाय कीमतों में बढ़ोतरी कर रही है।