बिलासपुर। प्रदेश के बहुचर्चित डामर घोटाले की जांच की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य शासन ने डिवीजन बेंच के समक्ष जवाब दिया कि 200 करोड़ स्र्पये के डामर घोटाले की जांच पूरी कर ली गई है। तीन अफसरों को दोषी पाया गया है। जल्द ही इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। याचिकाकर्ता वीरेंद्र पांडेय की ओर से पैरवी करते हुए उनके वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता को शासन के जवाब और आने वाले दिनों में होने वाली कार्रवाई पर भरोसा नहीं है। याचिकाकर्ता की मांग है कि जब तक शासन स्तर पर कार्रवाई पूरी की जाए जनहित याचिका को जारी रखा जाए। याचिकाकर्ता के वकील की मांग को डिवीजन बेंच ने गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने शासन स्तर पर हो रही जांच को लेकर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा क्या जांच है जो इतनी लंबी चली। जांच में निश्चित रूप से विलंब हुआ है।छत्तीसगढ़ में 200 करोड़ स्र्पये के बहुचर्चित डामर घोटाले की जांच की मांग को लेकर वीरेंद्र पांडेय ने हाई में जनहित याचिका दायर की थी। सोमवार को जनहित याचिका की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। राज्य शासन की ओर से पैरवी करते हुए महाधिवक्ता कार्यालय के विधि अधिकारी ने बताया कि डामर घोटाले की जांच राज्य शासन ने पूरी कर ली है। तीन बड़े अफसरों को दोषी पाया गया है। जल्द ही उनके खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई जाएगी। राज्य शासन ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिया है। विधि अधिकारी के जवाब के बाद डिवीजन बेंच ने जांच पड़ताल की प्रक्रिया को लेकर तल्ख टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि जांच ऐसी भी और इतनी लंबी भी चलती है। राज्य शासन के जवाब के बाद डिवीजन बेंच ने वीरेंद्र पांडेय की जनहित याचिका को निराकृत कर दिया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को छूट देते हुए कहा कि अगर शासन की जांच व कार्रवाई में कोई मुद्दा उठता है या याचिकाकर्ता को लगता है कि घोटाले में संलिप्त अफसरों को बचाया जा रहा है तो ऐसी स्थिति में याचिकाकर्ता दोबारा हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सकते हैं। इसके लिए वे स्वतंत्र हैं।
पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जताई थी नाराजगी
पिछली सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने शासन के जवाब को लेकर नाराजगी जताई थी। नाराज कोर्ट ने शासन से कहा था कि उन दस्तावेज को कोर्ट में फाइल करें, जिसमें कार्रवाई करने का उल्लेख किया गया है। इसकी एक प्रति याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए थे।
क्या है मामला
प्रदेश की 21 सड़कों के निर्माण के लिए एडीबी(एशियन डेवलपमेंट बैंक) से राज्य सरकार ने 1200 करोड़ स्र्पये का कर्ज लिया था। एडीबी द्वारा कर्ज देने के बाद सड़कों का निर्माण शुरू किया गया। निर्माण के दौरान पीडब्ल्यूडी के अफसरों ने 200 करोड़ स्र्पये का डामर घोटाला किया है। डामर घोटाले की उच्च स्तरीय जांच की मांग को लेकर वीरेंद्र पांडेय ने वर्ष 2014 में जनहित याचिका दायर की थी। शासन ने अपने जवाब में बताया कि पीडब्ल्यूडी के तीन अधिकारियों को एसीबी ने आर्थिक अपराध करने का दोषी पाया है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 17 एक के तहत कार्रवाई की जानी है। राज्य शासन से कार्रवाई के लिए एसीबी ने अनुमति मांगी है। शासन ने अपने जवाब में कोर्ट को बताया है कि दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए एसीबी को अनुमति दे दी है।