छत्तीसगढ़ के जिस दुर्ग डिवीजन से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और गृह मंत्री सहित 6 मंत्री आते हैं, वहां एक भी वेंटीलेटर युक्त एम्बुलेंस नहीं है. गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों को बड़े अस्तपताल में ले जाने के लिए रायपुर से पहले वेंटीलेटर युक्त एम्बुलेंस मंगवाना पड़ता है. जब तक एम्बुलेंस नहीं पहुंचता, तब तक मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है. दुर्ग, भिलाई, राजनांदगांव, बालोद, बेमेतरा और कवर्धा जैसे जिलों में यदि कोई मरीज गंभीर बीमारी से ग्रसित है, ऐसे में अगर उन्हें रायपुर के बड़े अस्पताल में भेजना है तो इसके लिए वेंटीलेटर युक्त एम्बुलेंस की जरूरत होती है.
दुर्ग संभाग में वेंटीलेटर युक्त एम्बुलेंस नहीं होने की वजह से पहले रायपुर से मंगवाकर, फिर मरीजों को बड़े अस्पतालों में शिफ्ट किया जाता है. एम्बुलेंस को रायपुर से दुर्ग आने में लगभग 1 से डेढ़ घंटा लगता है. इतने समय तक गंभीर मरीजों को एम्बुलेंस के आने का इंतजार करना पड़ता है. सामाजिक कार्यकर्ता और निर्दलीय पार्षद वशिष्ठ नारायण मिश्रा ने भिलाई नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर कहा है कि भिलाई और दुर्ग शहर में एक भी वेंटीलेटर युक्त एम्बुलेंस नहीं है और प्रशासन से उपलब्ध कराने की मांग की है.
25 से 30 मरीजों को किया जाता है रेफर
वशिष्ठ नारायण मिश्रा ने अपने पत्र में लिखा है कि पूरे जिले में एक भी वेंटीलेटर युक्त एम्बुलेंस नहीं है. सेक्टर 09 स्थित जीवनदायिनी जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय में गंभीर बीमारियों, जैसे- कार्डियक, न्यूरो, किडनी, कैंसर और मनोरोग आदि के चिकित्सक उपलब्ध नहीं होने, साथ ही भिलाई शहर के दूसरे अस्पतालों में गंभीर बीमारियों के लिए चिकित्सक नहीं होने के कारण हर दिन लगभग 25 से 30 मरीजों को रायपुर के आस्पतालों में रेफर किया जाता है.
कई मरीजों की चली जाती है जान
उन्होंने कहा कि सामान्य और आपात स्थिति में वेंटीलेटर युक्त एम्बुलेंस पूरे जिले में उपलब्ध नही होने के कारण रायपुर से मंगवाना पड़ता है, जिसमें कई बार देरी होने से और समय पर उपलब्ध नहीं होने से मरीजों की जान भी चली जाती है, क्योंकि सही समय पर इलाज नही हो पाता है. भिलाई के आस्पतालों से लगातार मरीज रेफर किए जाते हैं. वशिष्ठ नारायण मिश्रा ने मांग की है कि जिला खनिज निधि या सामजिक संस्था के मदद से निगम क्षेत्र में एक वेंटीलेटर युक्त एम्बुलेंस की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए.