रायपुर । एक बार फिर प्रदेश के उच्च शिक्षा की गुणवत्ता की पोल खुल गई है। प्रदेश से एक भी विश्वविद्यालय को टाप -100 में जगह नहीं मिल पाई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क(एनआइआरएफ) 2022 के परिणाम शुक्रवार को जारी कर दिए हैं। इसमें इंजीनियरिंग के क्षेत्र में इस बार छत्तीसगढ़ से नेशनल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी (एनआइटी) जहां पिछड़ गया है। वहीं इंडियन इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट रायपुर (आइआइएम) एक रैंक उछाल में है।
एनआइटी इस बार 45.71स्कोर के साथ 65वें स्थान पर है। इसके पहले 2021 में यह 44.83 स्कोर के साथ 64वें स्थान पर था। 2020 में 67वें, 2019 में 74वें और 2018 में 81वें नंबर पर था। वहीं आइआइएम इस बार 63.57 स्कोर के साथ 14वें पायदान पर है। पिछली बार 2021 में यह 62.12 स्कोर के साथ 15वें नंबर पर था। पिछले 2019 और 2020 में लगातार आइआइएम 19वें पायदान पर रहा है। वहीं एम्स रायपुर 47.44 स्कोर के साथ देशभर में 49वें स्थान है।
प्रमुख संस्थानों को इतना मिला है अंक
संस्थान का नाम टीएलआर आरपीसी जीओ ओआइ परसेप्शन
एम्स रायपुर 74.76 20.99 50.79 71.22 14.29
फार्मेंसी संस्थान, पीटीआरएसयू 46.98 23.30 72.53 39.72 5.49
एनआइटी रायपुर 55.62 34.76 61.22 56.62 7.00
आइआइएम रायपुर 80.88 38.95 91.11 73.82 20.22
(सभी मानंदडों के लिए 100 प्रतिशत अंक निर्धारित है)
जानें किस मानदंड के क्या मायने
रैंकिंग कई मानदंडों के आधार पर हासिल की जाती है, जैसे शिक्षण, शिक्षण और संसाधन, अनुसंधान और व्यावसायिक अभ्यास, स्नातक परिणाम, आउटरीच और समावेशिता और संस्थान की धारणा आदि। इसे हम बिंदुवार समझ सकते हैं।
टीएलआर- टीचिंग लर्निंग रिसोर्स के अंतर्गत पठन-पाठन के लिए जरूरतों जैसे लैब, लाइब्रेरी, उपकरण, शिक्षक आदि का मूल्यांकन होता है।
आरपीसी- रिसर्च प्रोफेशनल प्रैक्टि्स के अंतर्गत श्ौक्षणिक व्यवस्था के साथ शिक्षकों के व्यक्तिगत परफार्मेंस का मूल्यांकन होता है।
जीओ- ग्रेजुएट आउटकम के अंतर्गत यह देखा जाता है कि विश्वविद्यालय से कितने विद्यार्थी हर वर्ष निकल रहे हैं।
ओआइ- आउटरिच एवं समावेशिता के अंतर्गत यह देखा जाता है कि विश्वविद्यालय अपने यहां की सुविधाआंे को दूसरों तक कितना पहुंचा पा रहा है।
परसेप्शन- इसके अंतर्गत इस बात का मूल्यांकन किया जाता है कि अमुक संस्थान के प्रति लोगों की धारणा क्या है। इसमें छात्र-छात्राओं के फीडबैक को भी लिया जाता है।
एक बार फिर विश्वविद्यालयों की सूची में टाप 100 में राज्य से कोई विश्वविद्यालय नहीं है। इसके अनुसार पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रैंक बैंड 151-200 और कलिंगा विश्वविद्यालय को रैंक बैंड 101-151 के बीच रखा गया है। वहीं कालेजों को कोई जगह नहीं मिली है। ए ग्रेड के रविवि को 2020 में 101-150 रैंक बैंड के भीतर रखा गया था, 2019 में यह रैंक बैंड 151-200 रैंक के बीच था। प्रदेश के विश्वविद्यालयों का पिछले छह साल से यही हालात है।
यहां फार्मेसी फिर पिछड़ी
फार्मेसी संस्थानों में पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय का फार्मेसी संस्थान 40.12 स्कोर के साथ 78वें पायदान पर है। पिछली बार 2021 में यह 39.33 स्कोर हासिल कर देशभर में 71वें पायदान पर था। वर्ष 2020 में 59वां स्थान मिला था और 2019 में 48वीं रैंक थी। इस बार गुरुघासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय का फार्मेसी संस्थान भी पिछड़ चुका है। इस बार यह 47.89 स्कोर के साथ 43वें स्थान पर है। पिछली बार 2021 में 45.64 स्कोर के साथ 42वें स्थान पर था।
इस बार रैंक सुधरी
पिछली बार हमम 15वें पायदान पर थे इस बार 14वें स्थान पर हैं। रिसर्च का दायरा लगातार बढ़ा है। आइआइएम रायपुर में विद्यार्थियों के प्लेसमेंट पैकेज में भी इजाफा हुआ है। नए कोर्स भी लांच हुए।
– प्रो. रामकुमार ककानी, निदेशक, आइआइएम, रायपुर
सुधारने का प्रयास करेंगे
विश्वविद्यालय अपने स्तर पर हमेशा गुणवत्तायुक्त शिक्षा देने का प्रयास करता है। वर्तमान में जो भी सुविधाएं हैं उसके अनुसार हम बेहतर करने का प्रयास कर रहे हैं। एनआइआरएफ रैंकिंग में जो भी विवि का स्थ्ाान है उसे और बेहतर करने का प्रयास करेंगे।
– डा. केएल वर्मा, कुलपति, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय
गुणवत्ता और बढ़ानी पड़ेगी
शिक्षक-छात्र का अनुपात असंतुलित हो गया है। प्रदेश में सबसे बड़ी कमी है कि यहां शिक्षक ही नहीं है। इसके कारण यहां रिसर्च का दायरा भी नहीं बढ़ पता है। रिसर्च के मामले में भी स्टैंडर्ड जनरल में पेपर प्रकाशित नहीं हो पाता है। जैसे पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में बहुत विभाग बहुत अच्छा कर रहे हैं लेकिन कुछ शिक्षक रिसर्च पेपर प्रकाशित नहीं कर पा रहे हैं। पीएचडी में भी गुणवत्तायुक्त काम नहीं हो पा रहा है। इसकी वजह से मूल्यांकन में हम कमजोर हो जाते हैं। दूसरे विश्वविद्यालयों व संस्थानों में भी यही हालात हैं।
-डा. हर्षवर्धन तिवारी, पूर्व कुलपति, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल एवं शिक्षाविद