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रायपुर। अधिकांश महिलाओं में पालीस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) की शिकायतें बढ़ रही है। इसकी वजह से महिलाओं में हार्मोंस का संतुलन बिगड़ जाता है। अनियमित माहवारी, समय पर ना आना या अधिक समय तक रक्तस्राव होना, बच्चे का गर्भ में ना ठहरना, अनचाहे बालो का बढ़ना, सिर दर्द, अनिद्रा जैसी अन्य समस्याएं हैं। करीब 70 फीसद महिलाएं इस समस्या से पीड़ित है।
30 वर्ष की उम्र के बाद शादी से होती है समस्याएं
यह बातें, हेलो डाक्टर कार्यक्रम के दौरान शासकीय मातृ एवं शिशु चिकित्सालय, कालीबाड़ी (जिला अस्पताल) में स्त्री रोग विशेषज्ञ डाक्टर किरण कांबले ने कही। उन्होंने कहा कि स्त्री रोग विभाग की ओपीडी में हर पांच में तीन महिलाएं पीसीओएस की शिकायत मिल रही है। इसका मुख्य कारण महिलाओं का देर से शादी करना, किसी भी वजह से तनाव, अनियमित जीवन शैली है। महिलाओं के लिए 25 वर्ष तक शादी करने का समय उचित होता है। अधिकतम 30 वर्ष तक शादी कर लेनी चाहिए। नहीं तो बाद में गर्भधारण के दौरान समस्याएं सामने आती है।
घर-परिवार के काम से स्वास्थ्य पर महिलाएं नहीं देती हैं ध्यान
डाक्टर किरण ने कहा कि घर-परिवार में उलझ जाने के कारण अधिकांश महिलाएं अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं देती हैं। बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं, जिनपर महिलाएं खुलकर बात भी नहीं करतीं। इस लापरवाही के कारण से होने वाली कई तरह की बीमारियां, जिन्हें शुरुआत में ही थोड़े इलाज से ठीक किया जा सकता था, वह गंभीर रूप ले लेता है। इसलिए महिलाएं खुद के स्वास्थ्य को लेकर जागरूक बनें। समय पूर्व जांच व इलाज कराएं।
हर माह 200 से अधिक डिलीवरी
डाक्टर किरण बताया कि जिला अस्पताल कालीबाड़ी में स्त्री रोग विभाग की ओपीडी में हर रोज करीब 200 महिलाओं की जांच और इलाज किया जाता है। वहीं, माह में 200 से अधिक प्रसव कराई जाती है। इसके अतिरिक्त स्त्री व शिशु रोग से जुड़ी अन्य बीमारियों के इलाज की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध है।
हेलो डाक्टर कार्यक्रम में पाठकों के सवाल, चिकित्सक के जवाब
खून की कमी है, कभी-कभी चक्कर भी आते हैं। – रीना झा, रायपुर
जवाब : खान-पान का ध्यान रखें। शरीर कमजोर होता है तो चक्कर आने की शिकायतें देखी जाती है। आप जिला अस्पताल की ओपीडी में आकर दिखा सकते हैं।
सप्ताहभर पहले बच्चा हुआ है। दूध नहीं बन पा रहा है। – कुमारी सोनी, रायपुर
जवाब : सामान्यत: बच्चे के जन्म के तीन दिन के भीतर दूध बनना शुरू हो जाता है। यदि समस्या आ रही तो दवाओं से यह ठीक हो जाएगा। घबराने वाली बात नहीं है।
सिर दर्द की शिकायत रहती है। – उमा साहू, बालोद
जवाब : मानसिक तनाव, मासिक धर्म के दौरान महिलाओं में सिर दर्द की शिकायतें देखी जाती है। जो सामान्य होती है। यदि लंबे समय से दिक्कत है तो यह माइग्रेन भी हो सकता है। न्यूरोलाजिस्ट को दिखाएं।
स्तन में गांठ है। पहले छोटा था, लेकिन अब बढ़ता जा रहा है। – नेहा, भिलाई
जवाब : गांठ में यदि दर्द ना हो और बढ़ नहीं रहा तो खतरा नहीं है। लेकिन यदि गांठ बढ़ रहा हो तो यह स्तन कैंसर भी हो सकता है। इसलिए जल्द जांच करा लें।
एनिमिया का मुख्य कारण क्या है। – सुजला भारद्वाज, रायगढ़
जवाब : कुपोषण, एनिमिया का सबसे बड़ा कारण है। खान-पान का ध्यान नहीं रखने, सही पोषण ना मिलने से यह समस्या आती है। स्वास्थ्य को लेकर जागरूक होने की जरूरत है। साल में एक बार शारीरिक जांच कराएं। किसी तरह की प्रारंभिक समस्या में बीमारियां जल्दी ठीक हो जाती है।
क्या डिलीवरी में आपरेशन जरूरी है। खिलेश्वरी साव, बलौदाबाजार
जवाब : गर्भ के पहले माह से ही स्त्री रोग विशेषज्ञ से नियमित जांच व स्वास्थ्य का बेहतर ध्यान रखें। प्रसव के समय जांच में यदि सभी रिपोर्ट सामान्य रहती है तो 90 फीसद नार्मल डिलीवरी संभव है। किसी तरह की समस्या होने की स्थिति में आपरेशन करना जरूरी हो जाता है।
गर्भावस्था के दौरान किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। – निशा वर्मा, भिलाई
जवाब : डाक्टर से नियमित जांच कराएं। खान-पान का ध्यान रखें, देर तक न खड़ी रहें, ज्यादा मिर्च-मसाले वाला खाना न खाएं। किसी तरह की समस्या आए तो डाक्टर की सलाह लें।
जननांग में बार-बार इंफेक्शन हो रहा है। – एक महिला, बिरगांव
जवाब : आपको तो साफ-सफाई का ध्यान रखना जरूरी है। साथ ही आपके पार्टनर को भी इसका ध्यान रखना होगा। गीला कपड़ा ना पहनें। इससे आप इंफेक्शन से बचेंगे। अभी यदि अधिक दिक्कत है तो आप अस्पताल में जांच करा सकते हैं। दवाएं देंगे, उससे राहत मिलेगी।
कोविड हुआ था अब ठीक हो चुका है। पांचवा महीना चल रहा है। बच्चे को तो कोई समस्या तो नहीं आएगी। – मीना, महासमुंद
जवाब : आप स्वस्थ हैं और यदि किसी तरह की दिक्कत नहीं है तो डरने वाली कोई बात नहीं है। समय-समय पर चिकित्सकीय जांच कराते रहें। स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
दो बार गर्भपात हो चुका है, क्या इससे कोई दिक्कत हो सकता है। – यामिनी, दुर्ग
जवाब : बार-बार गर्भपात होने या कराने से बच्चादानी को क्षति पहुंचती है। इससे आगे चलकर गर्भवस्था में समस्याएं तो आती ही है। समस्याएं अधिक आ रही तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से जांच कराएं।