बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने मृत आरक्षक के माता पिता की याचिका पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण फैसला दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि अपर कलेक्टर को उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की है कि उन्होंने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर प्रमाण पत्र जारी किया है। इस टिप्पणी के साथ ही कोर्ट ने अपर कलेक्टर द्वारा जारी उत्तराधिकार प्रमाण पत्र पर रोक लगा दी है। हाई कोर्ट ने गृह सचिव,पुलिस महानिदेशक,कलेक्टर,आइजी व एसपी को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने का निर्देश दिया है।
मामला बेमेतरा जिला का है। आरक्षक ने दो शादी की थी। पहली पत्नी से तलाक के बाद दूसरी बार विवाह किया। दूसरी पत्नी अपने ही पति के हत्या के मामले में जेल की सजा काट रही है। बेमेतरा जिले में पदस्थ आरक्षक कमल प्रसाद बघेल का विवाह रजनी बघेल से हुआ था। विवाह के बाद कुछ वर्ष तक सब कुछ ठीक रहा है। इसी बीच दोनों के बीच अनबन शुरू हो गई और वर्ष 2016 में रजनी ने अपने पति से तलाक ले लिया। पत्नी से तलाक के बाद आरक्षक कोमल ने कीर्ति बघेल के साथ दूसरी शादी कर ली।शादी के कुछ महीने के बाद ही पति पत्नी के बीच विवाद इतना बढ़ा कि पत्नी ने 25 जनवरी 2020 को अपने पति की हत्या कर दी। पुलिस ने भादवि की धारा 302 के तहत अपराध दर्ज करते हुए निचली अदालत में चालान पेश किया। सुनवाई के बाद निचली अदालत ने पति की हत्या के आरोप में कीर्ति को आजीवन कारावास की सजा सुना दी है। वर्तमान में वह रायपुर सेंट्रल में सजा काट रही है।
इसी बीच आरक्षक की पहली पत्नी रजनी बघेल ने पति की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति सहित उनकी संपत्ति के लिए उत्तराधिकारी का दावा पेश कर दिया। बेमेतरा जिला दंडाधिकारी के कोर्ट में सुनवाई प्रारंभ हुई। कलेक्टर व जिला दंडाधिकारी ने मामला अपर कलेक्टर को रेफर करते हुए सुनवाई का आदेश जारी किया। अपर कलेक्टर के कोर्ट में सुनवाई प्रारंभ हुई। सुनवाई के बाद अपर कलेक्टर ने आवेदनकर्ता रजनी को मृतक पति का वास्तविक उत्तराधिकारी मानते हुए उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी कर दिया।
अपर कलेक्टर के फैसले को मृत आरक्षक के माता पिता ने अपने वकील के जरिए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में चुनौती दी है। याचिकाकर्ता माता पिता ने कोर्ट को बताया कि रजनी पहले ही उनके बेटे से विधिवत तलाक ले ली है और वह अलग रह रही है। उनको अलग रहते लंबा समय हो गया है। तलाक को कोर्ट की मंजूरी मिलने के बाद उनका अधिकार खत्म हो जाता है। याचिकाकर्ताओं ने अपर कलेक्टर के आदेश को निरस्त करने की गुहार लगाई है और यह भी कहा कि मृत बेटे के वास्तविक उत्तराधिकार वे लोग ही हैं लिहाजा उत्तराधिकार प्रमाण पत्र उनके नाम से ही जारी की जाए। मामले की सुनवाई हाई कोर्ट के सिंगल बेंच में हुई। प्रकरण की सुनवाई करते हुए सिंगल बेंच ने अपर कलेक्टर द्वारा रजनी के नाम जारी उत्तराधिकार प्रमाण पत्र पर रोक लगा दी है।
मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने गृह सचिव,पुलिस महानिदेशक,कलेक्टर,एसपी बेमेतरा व आइजी दुर्ग को नोटिस जारी करने के साथ ही मृतक आरक्षक की दोनों पत्नियों को भी नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। पहली पत्नी रजनी तलाकशुदा है और दूसरी पत्नी कीर्ति बघेल अपने पति के हत्या के आरोप में जेल में बंद है और आजीवन कारावास की सजा काट रही है।
जेल में बंद कीर्ति बघेल को हाई कोर्ट के नोटिस का जवाब देने के लिए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा वकील उपलब्ध कराया जाएगा। वकील के जरिए कीर्ति कोर्ट के समक्ष अपना जवाब पेश करेगी।