सड़क हादसे में शहर के यश चौथवानी की मौत का मामला तुल पकड़ने लगा है। लोक निर्माण विभाग के एसडीओ पीएस दीवान पर हिट एंड रन का मामला दर्ज कराने सिंधी समाज आगे आ गया है। शनिवार को समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने पत्रकारवार्ता लेकर एसडीओ के साथ पुलिस की भूमिका पर कई सवाल खड़े किए हैं।
राजनांदगांव। सड़क हादसे में शहर के यश चौथवानी की मौत का मामला तुल पकड़ने लगा है। लोक निर्माण विभाग के एसडीओ पीएस दीवान पर हिट एंड रन का मामला दर्ज कराने सिंधी समाज आगे आ गया है। शनिवार को समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने पत्रकारवार्ता लेकर एसडीओ के साथ पुलिस की भूमिका पर कई सवाल खड़े किए हैं। वहीं हिट एंड रन की धारा के आधार पर एसडीओ की तत्काल गिरफ्तारी व बर्खास्तगी की मांग की है। वहीं एसडीओ को बचाने की कोशश करने का आरोप लगाते चिखली चौकी प्रभारी शक्ति सिंह को पद से हटाकर विभागीय जांच की मांग भी रखी है। पौन घंटे बाद पहुंची पुलिस
यश के पिता अनिल चौथवानी ने कहा कि घटना के करीब 50 मिनट बाद पुलिस की टीम पहुंची। जबकि उससे पहले चिखली प्रभारी शक्ति सिंह वहां पहुंच गए और आपसी संबंध निभाते हुए एसडीओ को अपनी कार में ले गए। एसडीओ पर भी आरोप लगाते हुए कहा कि सुबह दस बजे कार्यालय पहुंचने के बजाय दोपहर 12 बजे तक एसडीओ दफ्तर नहीं पहुंचे थे। घटना के दौरान एसडीओ शराब के नशे में भी थे, पर पुलिस ने उन्हें बचाने के लिए डाक्टरी इलाज तक नहीं कराया। यश के पिता ने शहर के लोगों से मार्मिक अपील भी है कि सड़क हादसे का वीडियो बनाने के बजाय घायल लोगों की मदद करने पर ध्यान देना चाहिए।
एसडीओ को ही बताया जिम्मेदारः पत्रकारवार्ता में समाज के सदस्यों ने यश चौथवानी की मौत के लिए एसडीओ को ही जिम्मेदार बताया है। समाज के अर्जुनदास पंजवानी व यश के पिता अनिल चौथवानी ने कहा कि एसडीओ नशे की हालत में लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाते हुए यश को रौंद दिया और हादसे के बाद फरार हो गए। एसडीओ ने मानवता का परिचय नहीं दिया। अगर यश को घटना के बाद तत्काल अस्पताल ले जाते तो शायद यश की जान बच सकती थी। समाज के सदस्यों ने चिखली चौकी प्रभारी शक्ति सिंह पर आरोपित लगाया कि एसडीओ से आपसी संबंध निभाने के लिए उसे बचाने का प्रयास किया गया। पुलिस ने मामले में इमानदारी से कार्रवाई नहीं की है।शराब के नशे में वाहन चलाने वाले एसडीओ दीवान पर पुलिस ने सिर्फ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर खानापूर्ति की है। सिंधी समाज ने धारा 304-ए के बजाय धारा 304 के तहत कार्रवाई करने की मांग की है।