श्रीधाम वृंदावन के भागवत कथा वाचक पंडित इंद्रेश उपाध्याय ने कहा कि व्यक्ति को अपने गुरु और माता-पिता की आज्ञा अवश्य माननी चाहिए क्योंकि गुरु मंत्र ही भगवत प्राप्ति का सर्वश्रेष्ठ मार्ग है, जो मनुष्य को नरक जाने से बचाता है। पंडित उपाध्याय मंगलवार को स्थानीय दिग्विजय क्लब मैदान में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे।
श्रीमद् भागवत कथा के विविध कथा प्रसंगों यथा ध्रुव चरित, जड़ भरत कथा, अजामिल उपाख्यान, प्रहलाद चरित, श्री वामन अवतार, श्रीराम जन्मोत्सव और श्रीकृष्ण जन्म के संगीतमय कथा प्रसंगों की सविस्तार व्याख्या करते हुए भागवत कथा प्रवचनकार पंडित उपाध्याय ने कहा कि सहनशीलता, करूणा-दया, सर्वहितकारी, अजातशत्रु और मृदुभाषी मनुष्य के सर्वश्रेष्ठ पांच लक्षण हैं। लोगों को ऐसे व्यक्तियों का संगत करना चाहिए। यह पांचों लक्षण गौमाता, वृक्षों और वैष्णव भक्तों में भी होता है।
उन्होंने कहा कि किसी संत और प्रभु भक्त वैष्णव का अपमान कभी नहीं करना चाहिए। मनुष्य मन और बुद्धि में से मन का आश्रय ज्यादा लेता है और बुद्धि का त्याग कर देता है जिसके कारण उसे कष्ट सहन करना पड़ता है। पंडित इंद्रेश महाराज ने कहा कि भगवत भक्ति के लिए प्रभु का स्मरण करना चाहिए। प्रभु में ध्यान लगाना चाहिए और प्रभु के सामने शीश झुकाना चाहिए। इससे लोग भवसागर से पार हो सकते हैं। कथा सुनने आज बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।
आज श्रीकृष्ण जन्मोत्सव व बाल लीला: भागवत कथा के पांचवे दिन 9 नवंबर को दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, बाल लीला, गोवर्धन पूजा आदि कथा प्रसंग का वर्णन किया जाएगा। भागवत कथा के मुख्य आयोजक उमा देवेंद्र सिंह बैस ने श्रद्धालुओं से भागवत कथा का श्रवण करने की अपील की है।