जैसे-जैसे चुनाव की तिथि एक-एक दिन नजदीक आते जा रही है उसी अंदाज में यूथ कांग्रेस के उम्मीदवारों की सक्रियता भी बढ़ने लगी है। उम्मीदवारों की नजरें ग्रामीण क्षेत्रों पर कुछ ज्यादा ही टिकी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में मेंबरशीप पर भी इनका जोर कुछ ज्यादा ही है। यूथ कांग्रेस चुनाव में जिस तरह दिग्गज कांग्रेसी नेताओं की दखलंदाजी बढ़ रही है उसे लेकर भी अटकलबाजी का दौर जारी है। दिगगज राहुल माडल को एक बार फिर धता बताने में लग गए हैं।
उम्मीदवारों के ग्रामीण इलाकों पर किए जा रहे फोकस का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शहर के बजाय ग्रामीण क्षेत्रों में सदस्यता का आंकड़ा कुछ ज्यादा ही बढ़ा हुआ है। शहरी व ग्रामीण क्षेत्र को मिलाकर तरकीबन 11 लाख 10 हजार सदस्यता संख्या पहुंचने की अटकलें भी तेज हो गई है। यूथ कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष को लेकर दो उम्मीदवारों के बीच सीधी टक्कर है। दोनाें ही उम्मीदवार ज्यादा से ज्यादा यूथ को सदस्य बनाकर वोट अपनी झोली में डालने कवायद कर रहे हैं। विधायक व मंत्रियों के विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव प्रचार के दौरान खींचतान की स्थिति भी बनने लगी है। उम्मीदवार भी मंत्री व विधायकों से संपर्क साध रहे हैं और उनसे आशीर्वाद भी मांग रहे हैं। यही कारण है कि दिग्गजों की दिलचस्पी के साथ हस्तक्षेप भी बढ़ने लगा है।
चुनावी जोर आजमाइश के बीच उम्मीदवारों ने अपने संपर्क सूत्रों के माध्यम से प्रदेशभर में छह लाख से अधिक नए सदस्य बना लिए हैं। जून के पहले पखवाड़े तक मतदान होना है। इससे ऐसा माना जा रहा है कि यह आंकड़ा 10 लाख को पार कर जाएगा। कांग्रेसी रणनीतिकार इसे स्वस्थ प्रतिस्पर्धा मानकर चल रहे हैं और जिस अंदाज में मेंबरशिप हो रही है उसे संगठन के लिए अच्छा संकेत मान रहे हैं।
प्रदेशाध्यक्ष के चुनाव को लेकर सीधी टक्कर के बाद भी गुटबाजी साफतौर से नजर आ रही है। इसके बाद भी उम्मीदवार अपने संपर्क सूत्रों के जरिए उन उम्मीदवारों से संपर्क साध रहे हैं जो स्वतंत्र रूप से अलग-अलग पदों के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। इन उम्मीदवारों को समर्थन करने और बदले में भीतर ही भीतर समर्थन करने का भरोसा भी दिला रहे हैं। यह रणनीति कितनी सफल होगी यह तो चुनाव परिणाम के बाद ही पता चलेगा। बहरहाल उम्मीदवार सभी तरह के विकल्पों को खुला रखकर वोट की गुंजाइश देख रहे हैं।