संस्कारधानी में देशभर से पहुंचे बॉस्केट बॉल कोच और खिलाड़ियों को ढाई सौ रुपए में खाने की क्वालिटी पसंद नहीं आ रही है। अधिकांश राज्यों के कोच और खिलाड़ी शहर के होटल-ढाबों और रेस्त्रां में अपनी पसंद का भोजन करने मजबूर हैं। आयोजन में अव्यवस्था का आलम है। जहां उन्हें ठहराया गया है वहां से उन्हें लाने और ले जाने के लिए बसें भी नहीं हैं। 700 बच्चों को लाने-ले जाने के लिए मात्र 9 बसें लगाई गई हैं। दिनभर यहां खिलाड़ियों को दो से तीन किमी पैदल स्टेडियम तक पहुंचना होता है। कोच और खिलाड़ियों ने भोजन की क्वालिटी देख भुगतान करने से मना कर दिया। उनका कहना है इतनी राशि में वह रेस्त्रां में अपनी पसंद को भोजन करेंगे।
राजनांदगांव को 67वीं राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा स्पर्धा करने की मेजबानी करने का मौका मिला है। देश के विभिन्न राज्यों एवं संस्थाओं की 30 टीमों के 684 खिलाड़ी शामिल हुए हैं। यह बॉस्केट बॉल स्पर्धा दिग्विजय स्टेडियम में 4 से 7 जनवरी के बीच खेली जा रही है जिसमें अंडर 14 एवं अंडर 17 बालक-बालिका खिलाड़ी खेल का प्रदर्शन कर रहें हैं। खिलाड़ियों के लिए स्कूलों में आवास का इंतजाम किया गया है। वहीं परिवहन परिवहन के लिए बसों की सुविधा दी गई है। महेश नगर के हॉस्टल में सेंट्रल मेस भी बनाया गया। कुछ कमरों में बालकों को ठहराया गया है। कोचेस का कहना है सेंट्रल मेस को 250 रुपए देने की बजाए थोड़े और पैसे मिला कर वह रेस्त्रां में भोजन कर रहे हैं।

खिलाड़ियों और उनके साथ पहुंचे पालकों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि सेंट्रल मेस में बनने वाली दाल पतली और चावल मोटा है। सब्जी की क्वालिटी पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि वह शिकायत नहीं करना चाहते बल्कि रेस्त्रां में खुद और अपने बच्चों की पसंद का भोजन करा रहे हैं। शुक्रवार को सेंट्रल मेस में खिलाड़ियों को चावल, दाल फ्राय, दाल मखनी एवं आलू मटर की सब्जी, रोटी, पापड़, सलाद, आम का आचार दिया गया। कुछ राज्यों के खिलाड़ियों ने वहीं सेंट्रल में भोजन किया जबकि अन्य रेस्त्रां रवाना हो गए थे।
कई राज्यों के कोच ने बताया कि एक दिन एक बच्चे के दो टाईम खाने और नाश्ते का खर्च 250 रुपए के हिसाब से 4 दिनों के भोजन की राशि सेंट्रल मेस में पहले से जमा करनी थी। उन्हें डर है कि राशि जमा करने के बाद भोजन की क्वालिटी खराब रही तो वह बाहर भी भोजन नहीं कर पाएंगे। मजबूरी में उन्हें सेंट्रल मेस में भोजन करना पड़ता। इस कारण उन्होंने बाहर ही भोजन करने का निर्णय लिया है। हालांकि उन्होंने स्कूलों में गद्दे, चादर, तकिया, कंबल, प्रकाश, पानी, स्कूलों में लगे पंखों और शौचालयों में सफाई को लेकर कोई शिकायत नहीं की।