शहर की नायर दंपती ने शिक्षक दिवस के अवसर पर अंगदान की घोषणा की है। महेश नगर निवासी पूर्व प्रशासक गायत्री विद्यापीठ सुरेश नायर (59) और उनकी पत्नी डॉ.नीता एस नायर (58) ने मरणोपरांत शरीर के सभी उपयोगी अंगों का दान करने का संकल्प लिया है। डॉ. नीता वर्तमान में कमलादेवी महाविद्यालय में क्रीड़ा अधिकारी के पद पर पदस्थ हैं। 16 साल पहले 7 जुलाई 2008 में डॉ. नीता के पिता एनआर पिल्ले (सेवानिवृत्त शिक्षक) ने देहदान किया था। मरणोपरांत उनके शरीर को मेडिकल कॉलेज मेकाहारा रायपुर में डोनेट किया गया था।
राजनांदगांव.. शिक्षा जगत से जुडे़ शहर की एक दंपती ने मरणोपरांत देहदान करने का निर्णय लिया है। मरणोपरांत उनकी बॉडी मेडिकल के विद्यार्थियों और जरूरमंदों के काम आएगी। उनका मानना है कि अंगदान को बढ़ावा देने की जरूरत है। भारत में अंगदान करने वालों की संया 0.1 प्रतिशत है। जबकि इसे लेकर लोगों में जागरूकता लाने 13 अगस्त को विश्व अंगदान दिवस मनाया जाता है।
शहर में निवासरत व कमलादेवी राठी महिला महाविद्यालय में पदस्थ क्रीडा अधिकारी डॉ. नीता एस नायर व उनके पति जो कि शहर के प्रतिष्ठित स्कूल गायत्री विद्यापीठ में प्रशासक का पद संभाल चुके सुरेश नायर ने मरणोपरांत शरीर के सभी उपयोगी अंगो का दान करने का संकल्प लिया है। डॉ. नीता एस नायर ने बताया कि 7 जुलाई 2008 को उनके पिता स्व. एनआर पिल्ले (रिटायर्ड प्राचार्य, हायर सेकेंडरी स्कूल) ने भी अपना अपना देहदान किया था। उन्होंने मेडिकल कालेज (मेकाहारा) रायपुर में अपना देहदान किए थे। कॉलेज की क्रीडा अधिकारी ने बताया कि उनके पिता ने देहदान का संकल्प के साथ ही मृत्यु भोज नहीं करवाने की इच्छा जाहिर की थी। उनकी इच्छा का मान रखते हुए मृत्यु भोज पर खर्च होने वाली राशि को भी वृद्धाश्रम में दान कर दिया गया। उनसे ही प्रेरित होकर नायर दपत्ति ने 2008 में ही मरणोपरांत अंगदान करने का संकल्प लिया था, जिसकी विधिवत घोषणा विवाह के 31 वें वर्षगांठ पर की।