बिलासपुर। रेडी टू ईट वितरण को लेकर राज्य सरकार की नीति को हाई कोर्ट ने सही ठहराते हुए महिला स्व सहायता समूहों की ओर से दाखिल 287 याचिकाओं को खारिज कर दिया है। कोर्ट के फैसले से राज्य सरकार को राहत मिली है। राज्य सरकार ने अपने जवाब में कहा था कि रेडी टू ईट के वितरण को केंद्रीयकृत करने से आहार की व्यवस्था और गुणवत्ता दोनों बेहतर होगी। राज्य सरकार ने प्रदेशभर में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए महिलाओं और बच्चों में बंटने वाले रेडी टू ईट का उत्पादन स्वचालित मशीन से कराने का निर्णय लिया है।
राज्य सरकार के निर्णय को चुनौती देते हुए महिला स्व सहायता समूहों की ओर से अलग-अलग याचिकाएं हाई कोर्ट में दायर की गई थीं। याचिकाकर्ता समूहों की ओर से कहा गया था कि छत्तीसगढ़ सरकार ने वर्ष 2018 में रेडी टू ईट के वितरण और निर्माण की व्यवस्था महिला स्व सहायता समूहों को सौंपा गया था। इसके माध्यम से महिला स्वावलंबन को बढ़ावा देने का प्रयास था। अब राज्य सरकार ने महिला समूहों से काम छीनकर स्वचालित मशीन के जरिए रेडी टू ईट का निर्माण करने और अपने निर्देशन में वितरण का निर्णय लिया है। राज्य सरकार के इस निर्णय से इस काम में लगीं महिलाएं बेरोजगार हो जाएंगी।
राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम को काम
हाईकोर्ट में अलग-अलग स्व सहायता समूह की ओर से करीब 287 याचिकाएं दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने 28 जनवरी को सुनवाई करते हुए शासन के आदेश पर रोक लगा दी थी और स्व सहायता समूह को आगामी सुनवाई तक बिना किसी बाधा के कार्य करने का आदेश दिया था। छत्तीसगढ़ शासन ने अपने जवाब में कहा था कि छत्तीसगढ़ में चल रही रेडी टू ईट योजना से महिला स्व सहायता समूहों को पूरी तरह से बाहर नहीं किया गया है। वह इसका निर्माण कार्य नहीं करेंगी, लेकिन फूड का परिवहन और वितरण की जिम्मेदारी उनके ही पास रहेगी। इसे बनाने का जिम्मा राज्य सरकार ने राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम को सौंप दिया है। शासन ने तर्क दिया था कि इससे पोषण आहार की गुणवत्ता में सुधार होगा।