CG : मनरेगा अंतर्गत मेट तिजेन्द्र साहू को मिला 70 दिवस का रोजगार,

धमतरी । तिजेन्द्र साहू, एक साधारण ग्रामीण युवक, लेकिन मजबूत इरादों और आत्मनिर्भर बनने की ललक के साथ जब महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) से जुड़ा, तब उसने केवल रोजगार ही नहीं पाया बल्कि अपनी सामाजिक भूमिका और आत्मसम्मान को भी सुदृढ़ किया।
मेट के रूप में नई शुरुआत- तिजेन्द्र साहू को मनरेगा के तहत ’’मेट’’ की जिम्मेदारी मिली कृ यानी कार्यस्थल पर निगरानी, मजदूरों की हाजिरी, मस्टर रोल संधारण एवं कार्य की गुणवत्ता का निरीक्षण करना। यह भूमिका उसके लिए न केवल आर्थिक सशक्तिकरण का साधन बनी, बल्कि ग्राम में उसकी एक अलग पहचान भी बनी।
पाथ उपचार
वृक्षारोपण और तालाब गहरीकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्य मनरेगा के अंतर्गत ग्राम पंचायत में वर्ष 2024-25 में तीन प्रमुख कार्य प्रारंभ किए गए, जिनमें तिजेन्द्र की सक्रिय भागीदारी रही। जिसमें वृक्षारोपण अभियान में उसने श्रमिकों की भागीदारी सुनिश्चत की, पौधों की सुरक्षा हेतु गड्ढे खुदवाए, नियमित सिंचाई व्यवस्था पर नजर रखी। पथ उपचार कार्य के तहत ग्रामीण सड़कों की मरम्मत और समतलीकरण में श्रमिकों के साथ समन्वय कर काम को सुचारु रूप दिया।
तालाब गहरीकरण में उसने समयबद्ध प्रगति, पानी की निकासी और सुरक्षा को प्राथमिकता दी। इन कार्यों के दौरान 70 दिवस तक नियमित रोजगार मिलने से तिजेन्द्र को लगभग 14 हजार रुपए से 17 हजार रुपए तक की आमदनी हुई, जिससे उसने अपने परिवार की आवश्यकताएं पूरी की। बच्चों की पढ़ाई का खर्च, आवश्यक खाद्यान्न की खरीद, और कुछ राशि बचत के रूप में भी रखी।
मनरेगा मेट तिजेन्द्र साहू ने बताया कि की पहले मैं दिहाड़ी मजदूरी के लिए गांव से बाहर जाता था, पर अब गांव में ही रोजगार मिल रहा है। मेट बनकर न केवल आमदनी बढ़ी है, बल्कि लोग मेरी बात भी सुनने लगे हैं। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ने मेरी जिंदगी को दिशा दी है।
मेट के रूप में तिजेन्द्र अब केवल एक श्रमिक नहीं, बल्कि ग्राम विकास की एक मजबूत कड़ी बन चुका है। उसने ग्रामीणों को समय पर हाजिरी भरना, कार्य में अनुशासन और पेड़-पौधों की देखरेख जैसे विषयों में जागरूक किया। उसकी मेहनत से पंचायत में कार्यों की गुणवत्ता भी बेहतर हुई।





