छत्तीसगढ़धमतरी जिला

CG : मनरेगा योजना से 19 लाख 97 हजार रुपए की लागत से बना नारधा ग्राम का अमृत सरोवर…

धमतरी । जिले के मगरलोड विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत डूमरपाली का आश्रित ग्राम नारधा आज एक नई पहचान बना चुका है। जहां कभी एक पुराना तालाब अपनी उपेक्षा की पीड़ा झेल रहा था वहीं आज वह अमृत सरोवर के रूप में विकसित होकर ग्रामवासियों की आजीविका, कृषि और पर्यावरण का केंद्र बन चुका है। 

इस सफलता की पृष्ठभूमि में है 150 वर्ष पूर्व संत वनवास कुंवर की प्रेरणा और ग्रामवासियों का सामूहिक श्रम। वर्षों तक यह जलस्रोत ग्राम की सेवा करता रहा  किंतु समय के साथ उपेक्षा, गाद भराव और अव्यवस्थित उपयोग ने इसे निष्क्रिय बना दिया था नवीनीकरण की पहल को चरितार्थ करते हुए वित्तीय वर्ष – 2022-23 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत तालाब के पुनर्जीवन हेतु राशि – 19 लाख 97 हजार  की प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त हुई। जिससे तालाब का गहरीकरण, टो-वॉल निर्माण, पचरी एवं आउटलेट निर्माण तथा परिसर में  सौंदर्यीकरण का कार्य किया गया। इन कार्यों से तालाब की जलधारण क्षमता तो बढ़ी ही, साथ ही आसपास का पर्यावरण भी समृद्ध हुआ।

ग्राम विकास समिति ने न केवल कार्यों की निगरानी की, बल्कि तालाब के चारों ओर पौधारोपण कर सौंदर्यीकरण को नया स्वरूप दिया। उन्होंने तालाब की सफाई, संरक्षण और पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी भी निभाई। मंदिर परिसर के समीप जन सहयोग से सीसी सड़क का निर्माण कर एक सुंदर, स्वच्छ और उपयोगी बैठकी स्थल विकसित किया गया  जहां समूह बैठकें और सांस्कृतिक आयोजन सहज रूप से संपन्न होते हैं । तालाब के जीर्णाेद्धार से मछली पालन की संभावनाएं विकसित हुई है। वर्तमान में ‘जय पैरी मछुआरा समिति’ द्वारा तालाब में व्यवस्थित रूप से मछली पालन किया जा रहा है। इससे मछुआरा समिति को प्रतिवर्ष लगभग  50,000 रुपए की आमदनी हो रही है, जिससे उनके जीवन में आर्थिक स्थिरता आई है।

तालाब का जल विशेष रूप से गर्मी के मौसम में धान की अंतिम सिंचाई के लिए उपयोग किया जाता है। इससे गांव के किसानों को संकट के समय राहत मिलती है और उनकी फसलें बच जाती हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से सुरक्षित महसूस करते हैं। नारधा ग्राम का यह ‘अमृत सरोवर’ केवल जलस्रोत नहीं, सामूहिक श्रम, संत प्रेरणा, ग्राम समिति की सक्रियता और शासन की योजनाओं के सफल क्रियान्वयन का प्रतीक बन चुका है।