सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: खराब हाईवे पर टोल वसूली गलत, NHAI को फटकार

नई दिल्ली: सड़कें खराब, ट्रैफिक जाम, और फिर भी टोल वसूली? अब ऐसा नहीं चलेगा! सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि अगर हाईवे की हालत खस्ता है, तो टोल वसूलना गलत है। यह फैसला केरल हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखता है, जिसमें खराब सड़कों के कारण टोल वसूली पर रोक लगाई गई थी। आइए, इस ऐतिहासिक फैसले के बारे में विस्तार से जानते हैं!
क्या है पूरा मामला?
मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने NHAI की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें केरल हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। केरल हाईकोर्ट ने त्रिशूर जिले के पलियेक्कारा टोल प्लाजा (NH-544) पर टोल वसूली रोकने का आदेश दिया था, क्योंकि एडप्पली-मन्नूथी खंड की सड़क की हालत बेहद खराब थी। खराब रखरखाव और अधूरे निर्माण कार्यों की वजह से इस हाईवे पर भारी ट्रैफिक जाम की समस्या थी।
6 अगस्त 2025 को केरल हाईकोर्ट ने साफ कहा था कि जब तक जनता को सुरक्षित और सुगम सड़क नहीं मिलती, तब तक टोल वसूलना जनता के भरोसे का उल्लंघन है। हाईकोर्ट ने टोल वसूली पर चार हफ्तों की रोक लगाई थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फैसले को सही ठहराया है।
तथ्य जांच: केरल हाईकोर्ट का आदेश 6 अगस्त 2025 को जारी हुआ था, और सुप्रीम कोर्ट ने इसे 20 अगस्त 2025 को बरकरार रखा। यह जानकारी समाचार स्रोतों और कोर्ट के बयानों से पुष्ट है।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
सुप्रीम कोर्ट ने NHAI को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा, “जब कोई नागरिक टोल देता है, तो उसे बदले में अच्छी और सुरक्षित सड़क का हक है। अगर NHAI या उसका ठेकेदार यह सुविधा देने में नाकाम रहता है, तो टोल वसूलना जनता के साथ धोखा है।” कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि टोल वसूली का आधार यह है कि यात्रियों को बिना रुकावट और सुरक्षित यात्रा मिले। अगर ऐसा नहीं होता, तो टोल व्यवस्था की नींव ही हिल जाती है।
कोर्ट ने एक सवाल उठाया, “अगर एक घंटे की दूरी तय करने में 12 घंटे लगते हैं, तो लोग 150 रुपये टोल क्यों दें?” कोर्ट ने यह भी कहा कि नागरिक पहले ही मोटर व्हीकल टैक्स दे चुके हैं, ऐसे में खराब सड़कों पर टोल वसूलना लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल उठाता है।
खराब सड़कें, ट्रैफिक जाम और टोल का बोझ
सुप्रीम कोर्ट ने टोल बूथों पर होने वाली परेशानियों को भी रेखांकित किया। कोर्ट ने कहा कि सड़कें अक्सर लापरवाही या प्राकृतिक कारणों से खराब हो जाती हैं। टोल बूथ पर कर्मचारियों का मनमाना व्यवहार और घंटों तक ट्रैफिक जाम में फंसे रहना यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बनता है। कोर्ट ने टोल को “जेब, धैर्य, और पर्यावरण पर बोझ” करार दिया।
NHAI को राहत का रास्ता
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि जैसे ही सड़क का रखरखाव सुधरता है और ट्रैफिक सामान्य हो जाता है, NHAI या ठेकेदार टोल वसूली फिर से शुरू करने के लिए कोर्ट से अनुमति मांग सकते हैं। ठेकेदार नुकसान की भरपाई के लिए NHAI से मुआवजा या संचालन अवधि बढ़ाने की मांग कर सकते हैं। कोर्ट ने ठेकेदारों को राहत का प्रावधान दिया है, जैसा कि समाचार स्रोतों में बताया गया है।
क्यों अहम है यह फैसला?
यह फैसला देशभर के यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत है। यह न सिर्फ NHAI को जवाबदेह बनाता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि जनता को उनकी मेहनत की कमाई के बदले बेहतर सुविधाएं मिलें। खराब सड़कों और ट्रैफिक जाम से परेशान लोगों के लिए यह फैसला एक उम्मीद की किरण है। अगर आपके इलाके में भी टोल बूथ पर खराब सड़कों के कारण परेशानी हो रही है, तो इस फैसले का हवाला देकर शिकायत करें।





