कवर्धा जिलाछत्तीसगढ़

CG : कवर्धा में पत्रकार पर जानलेवा हमला, 24 घंटे में गिरफ्तारी नहीं हुई तो चक्काजाम की चेतावनी…

कवर्धा । कवर्धा जिले में शुक्रवार शाम पत्रकार सुरक्षा पर सवाल खड़े करने वाली बड़ी घटना सामने आई है। एक राष्ट्रीय चैनल से जुड़े पत्रकार संजय यादव और उनके कैमरामैन पर रिपोर्टिंग के दौरान हमला कर दिया गया। आरोप है कि स्थानीय जी.एस. मसाला और पानी बोतल कंपनी के मालिक ने पत्रकार की गर्दन पकड़कर उन्हें जान से मारने की कोशिश की। हमले के दौरान कैमरामैन के दो मोबाइल फोन छीन लिए गए और तीसरा मोबाइल छीनने की भी कोशिश की गई। किसी तरह दोनों अपनी जान बचाकर मौके से भाग निकले।

एफआईआर में देरी से नाराज़गी
घटना शाम 5 बजे की है, लेकिन पत्रकारों की शिकायत है कि पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में करीब छह घंटे की देरी की और रात 11 बजे मामला दर्ज किया। इससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। पत्रकार संगठनों का कहना है कि यह घटना न केवल एक व्यक्ति पर हमला है बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है।

पत्रकारों का अल्टीमेटम
कवर्धा के पत्रकारों ने प्रशासन को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि अगर आरोपियों संदीप गुप्ता और गणेश गुप्ता की गिरफ्तारी तय समय में नहीं होती है, तो वे धरना-प्रदर्शन और राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्काजाम करने के लिए बाध्य होंगे।

पत्रकारों ने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं—
पत्रकार संजय यादव पर दर्ज की गई कर्जी एफआईआर तत्काल निरस्त की जाए।
छिरपानी बॉटर और जी.एस. मसाला कंपनी की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई हो।

पत्रकार पर हमले के आरोपी 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार हों।

भविष्य में पत्रकार और उनके परिवार के साथ कोई अनहोनी होती है तो उसकी जिम्मेदारी आरोपियों पर होगी।
यदि गिरफ्तारी नहीं हुई तो पत्रकार सड़क पर उतरकर कड़ा विरोध प्रदर्शन करेंगे।

संगठनों की प्रतिक्रिया
स्थानीय पत्रकार संघों ने इस हमले को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला बताते हुए कहा है कि प्रशासन को इस मामले में संवेदनशील रवैया अपनाना होगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन तेज़ किया जाएगा।

पृष्ठभूमि और सवाल
यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब देशभर में पत्रकार सुरक्षा को लेकर लगातार आवाज़ उठ रही है। कवर्धा की घटना ने एक बार फिर इस बहस को हवा दी है कि क्या प्रशासन पत्रकारों को सुरक्षित माहौल देने में नाकाम साबित हो रहा है?

अब यह देखना होगा कि पुलिस और प्रशासन 24 घंटे के भीतर क्या कदम उठाते हैं और पत्रकारों की चेतावनी के बाद हालात किस दिशा में जाते हैं।