राजनांदगांव
संस्कारधानी का एक प्रतिष्ठित परिवार चिकित्सा के क्षेत्र सम्मान जनक नाम से जाना जाता है। यह निजी नर्सिंग होम जिसे अपनी माता के स्मृति में बनाया गया है इस संस्थान के भाई-बहन की लड़ाई अब थाने तक पहुंच गई है। मामले में एफआईआर 0783/28/12/2024 दर्ज कर लिया गया है और भारतीय न्याय संहिता की 115(2),296 ,3(5),351(2) धाराएं लगाई गई हैं। मामले का विस्तृत विवरण प्रार्थिया ने जो दिया है वह है कि मैं डॉक्टर सुरभि महोबे अस्पताल बलदेव बाग राजनांदगांव में रहती हूं, महोबे अस्पताल में डाक्टर हूं। मेरा छोटा भाई सौरभ महोबे भी हमारे साथ मे रहता है और शादी शुदा है जिसकी पत्नि दिल्ली में रहकर मेडिकल की पढ़ाई कर रही है। मेरा भाई सौरभ महोबे मेरी अनुपस्थिती मे अस्पताल में अपनी गर्लफ्रेंड को लेकर आ जाता है।
दिनांक 28/12/2024 को भी रात्रि 08.30 से 09.00 बजे के बीच उसी लडकी को लेकर अस्पताल आया था जिसको मैंने महोबे अस्पताल के पार्किंग में देख लिया तो हमारे परिवार की इज्जत और मर्यादा को ध्यान में रखकर मैंने अपने भाई सौरभ को इस तरह का काम करने से मना किया जिस पर मेरे भाई सौरभ और उसकी गर्लफ्रेंड ने एक साथ मिलकर मुझे अश्लील गाली गलौज करते जान से मारने की धमकी देते हुये मुझे हाथ मुक्का और लात से मारपीट किए तथा मेरे भाई ने मेरा गला दबाने का प्रयास किया जिससे मेरे होठ, दाहिने हाथ की इंडेक्स फिंगर, बांए पैर की जांघ, बांए हाथ की फोर्थ फिंगर में चोट लगी है दर्द हो रहा है।
घटना को मेरा ड्रायवर रंजीत सिंह देखा सुना है और बीच बचाव भी किया है। अस्पताल पूर्व में भी चिकित्सा संबंधी विवादों से घिरा रहा। चिकित्सा सेवा जैसे मानव सेवा के कार्यों में होने के बावजूद चिकित्सकों की लड़ाई और चरित्र सामने आने लगे तो संस्कारधानी के हिस्से का सम्मान आखिर खोने से कौन रोकेगा यह यक्ष प्रश्न जन मानस के लिए चिंतनीय है।