हॉस्टल के 426 छात्रों को जहरीला खाना खिलाने वाला टीचर गिरफ्तार, बदला लेने के इरादे से रची थी खौफनाक साजिश
सुकमा, छत्तीसगढ़ से एक चौंकाने वाली खबर ने सबको हिलाकर रख दिया है। पाकेला पोर्टा केबिन आवासीय विद्यालय में 426 बच्चों के खाने में फिनाइल मिलाने के आरोपी शिक्षक धनंजय साहू को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले ने न सिर्फ सुकमा, बल्कि पूरे देश का ध्यान खींचा है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस घटना पर स्वतः संज्ञान लिया और सख्त कार्रवाई की मांग की। आइए, इस सनसनीखेज मामले की पूरी कहानी जानते हैं।
क्या है पूरा मामला?
21 अगस्त 2025 को सुकमा के पाकेला पोर्टा केबिन आवासीय विद्यालय में बच्चों के लिए बनाए गए खाने में फिनाइल मिलाने की घटना सामने आई। गनीमत रही कि स्कूल स्टाफ ने खाने से तेज बदबू आने पर शक किया और उसे तुरंत फेंक दिया, जिससे 426 बच्चों की जान बच गई। जांच में पता चला कि ये खतरनाक हरकत शिक्षक धनंजय साहू ने की थी। पुलिस ने धनंजय को गिरफ्तार कर लिया, और कोर्ट ने उसे 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर भेज दिया।
रंजिश की वजह से फिनाइल मिलाया
पुलिस पूछताछ में धनंजय ने कबूल किया कि उसने हॉस्टल अधीक्षक दुजल पटेल से पुरानी रंजिश के चलते ये खतरनाक कदम उठाया। दरअसल, धनंजय पहले इस हॉस्टल का अधीक्षक था, लेकिन एक छात्र को बुरी तरह पीटने की वजह से उसे इस पद से हटा दिया गया था। उसकी जगह दुजल पटेल को अधीक्षक बनाया गया। तभी से धनंजय, दुजल से नाराज था और हॉस्टल को बदनाम करने के लिए उसने बच्चों के खाने में फिनाइल मिला दिया। कुछ स्रोतों में बताया गया कि धनंजय ने ये कदम अधीक्षक को हटवाने की साजिश के तौर पर उठाया।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
- गिरफ्तारी और रिमांड: सुकमा के SP रोहित शाह ने बताया कि धनंजय साहू को Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) की धारा 109 (हत्या का प्रयास) के तहत गिरफ्तार किया गया। उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर भेजा गया।
- निलंबन और तबादला: सुकमा कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव ने तुरंत कार्रवाई करते हुए धनंजय साहू को निलंबित कर दिया। हॉस्टल अधीक्षक दुजल पटेल को हटाकर समग्र शिक्षा में अटैच किया गया, और सहायक अधीक्षक गौतम कुमार ध्रुव को माध्यमिक शाला में भेजा गया। भवन सिंह मंडावी को नया अधीक्षक नियुक्त किया गया।
- हाईकोर्ट की सख्ती: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस घटना को “शॉकिंग” बताते हुए मुख्य सचिव से जवाब मांगा। कोर्ट ने कहा कि अगर 426 बच्चों ने ये खाना खा लिया होता, तो नतीजे भयानक हो सकते थे। कोर्ट ने स्कूलों में खाने की सुरक्षा के लिए सख्त नियम लागू करने के आदेश दिए।
कैसे बचा हादसा?
21 अगस्त की रात को बच्चों को खाने में सब्जी परोसी जानी थी। प्रोटोकॉल के तहत, स्टाफ ने खाना चखा और उसमें से तेज फिनाइल की गंध आई। पास में खाली फिनाइल की बोतलें भी मिलीं। अधीक्षक दुजल पटेल ने तुरंत खाना फेंकने का आदेश दिया और वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया। कलेक्टर ने तुरंत जांच कमेटी बनाई, जिसमें SDM, DMC और APC शामिल थे। जांच में धनंजय साहू का नाम सामने आया।
समाज में गुस्सा और सवाल
इस घटना ने सुकमा के आदिवासी इलाकों में गुस्सा पैदा कर दिया है। पोर्टा केबिन स्कूल, जो नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों की पढ़ाई के लिए बनाए गए हैं, अब सवालों के घेरे में हैं। अभिभावकों ने कहा, “हम अपने बच्चों को स्कूल सुरक्षित पढ़ाई के लिए भेजते हैं, लेकिन ऐसी घटनाएं हमारा भरोसा तोड़ रही हैं।” बस्तर राज मोर्चा ने स्कूल के बाहर धरना भी दिया।
अब आगे क्या?
पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है। हाईकोर्ट ने स्कूलों में खाने की सुरक्षा के लिए सख्त नियम लागू करने को कहा है, जैसे:
- रोजाना खाने का टेस्टिंग और रजिस्टर में रिकॉर्ड।
- रसोई और डाइनिंग हॉल में CCTV।
- खाद्य सामग्री और केमिकल्स को अलग-अलग रखना।
- फूड सेफ्टी ऑडिट और हेल्पलाइन शुरू करना।
ये घटना एक चेतावनी है कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को और मजबूत करना होगा। अगर आपका बच्चा भी ऐसे स्कूल में पढ़ता है, तो स्कूल प्रशासन से सवाल जरूर पूछें।