मोहला. नक्सलियों के आतंक को देखते हुए 13 साल से अपना गांव, घर-बार, जमीन छोड़कर मानपुर मुख्यालय में शरण लेकर रह रहे, पूर्व गोपनीय सैनिक व नक्सल मोर्चे पर तैनात आरक्षक के पिता को शुक्रवार की दोपहर बाद 3 बजे के लगभग मौत के घाट उतार दिया गया। घटना को अंजाम उसके गांव संबलपुर के बीच जंगल में नक्सलियों ने दिया है। इस घटना के सामने आते ही नक्सलियों द्वारा हत्या के बाद लगाए गए एंबुश की आशंका को देखते हुए कोहका थाना और मोहला- मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले की डीआरजी फोर्स आज सुबह घटनास्थल मानपुर विकासखंड के भूकमरका संबलपुर के जंगल पहुंची। जहां पूर्व गोपनीय सैनिक और नक्सल ऑपरेशन में तैनात आरक्षक के पिता रविंद्र साय कटेगा को उसके खेत के करीब सर में गोली मारते हुए धारदार हथियार से नक्सलियों ने उसे गोद डाला था। सुबह शव जंगल में पड़ा मिला। उसकी निर्ममतापूर्वक हत्या कर माओवादियों ने उसके मोटरसाइकिल को भी जलाकर खाक कर दिया है। जिले की कोहका और डीआरजी फोर्स, आरक्षक के पिता का शव लेकर मानपुर लौटी है। घटनास्थल जंगल और दुर्गम होने के साथ-साथ नक्सलियों के एंबुश लगाए जाने की आशंका पर फोर्स सुबह पहुंची घटनास्थल थी ।
नक्सल तांडव के बीच अपना घरबार जमीन छोड़कर रविंद्र साय कटेगा मानपुर में नक्सल पीड़ित के रूप में 2009 से निवासरत था 2,009/10 में बतौर गोपनीय सैनिक पुलिस फोर्स के लिए उसने काम भी किया। उसका एक बेटा पुलिस के आरक्षक पद पर पानाबरस पुलिस छावनी में पदस्थ है।
25 लोगों को मौत देने का नक्सल फरमान, अब तक 7 की हत्या
नक्सलियों ने मानपुर विकासखंड के डब्बा से लेकर संबलपुर तक25 लोगों को मारने का फरमान जारी किया हुआ है इस फरमान के मुताबिक अब तक माओवादियों ने 7 आदिवासी ग्रामीण व जनप्रतिनिधियो को दर्दनाक मौत दे चुके हैं।