इलाज में जीएसटी व आयुष्मान कार्ड में कटौती अत्याचार का प्रमाण
छत्तीसगढ़ प्रदेश महिला कांग्रेस कमेटी की सचिव अधिवक्ता कुसुम रूपेश दुबे ने केंद्र सरकार द्वारा आयुष्मान कार्ड जिसमे बीपीएल परिवार को 5 लाख रु एपीएल परिवार को 50 हजार रु की सुविधा निजी चिकित्सालयों में मिलती है उसमे सिजेरियन डिलीवरी के लिए 17 हजार 500 रु की सुविधा को समाप्त करने वाले निर्णय को नारी शक्ति के मातृत्व रूपी गर्व में बाधा एवं अत्याचार निर्णय रूपी निरूपित किया है।
महिला कांग्रेस की प्रदेश सचिव अधिवक्ता कुसुम दुबे ने कहा की केंद्र में बैठी भाजपा सरकार 17 अगस्त से आयुष्मान कार्ड में सिजेरियन डिलीवरी की सुविधा को समाप्त करने का जो निर्णय लिया है वह पीड़ादायक होने के साथ-साथ भाजपा की नारी शक्ति के प्रति दुर्भावना को भी प्रदर्शित करने वाला निर्णय है पूर्व में आयुष्मान कार्ड में नसबंदी और बच्चादानी के इलाज की सुविधा को भी समाप्त कर दिया गया था लेकिन डिलीवरी की सुविधा समाप्त करना घोर अन्याय कारक निर्णय हैं इस निर्णय से यह भी साबित हो गया कि भाजपा महिला विरोधी नीति पार्टी है।छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार के संरक्षण में तो नसबंदी कांड, गर्भाशय कांड,झलियामारी जैसे अत्याचार वाले मामले हुए थे और अब केंद्र की भाजपा सरकार ने डिलीवरी की सुविधा समाप्त कर यह साबित किया है कि भाजपा नारी शक्ति को ना सम्मान दे सकती है और ना ही उन्हें किसी प्रकार की सुविधा प्रदान करने की योजना लागू कर सकती है
केंद्र में बैठी भाजपा सरकार योजनाओं के नाम पर वाह वाही लूटने का ही कार्य करती है जैसे गरीबों को मिलने वाली उज्जवला गैस योजना में गरीब महिलाओं को गैस कनेक्शन का वितरण कर उन्हें 11 सौ रु से अधिक में रीफलिंग की मार झेलनी पड़ रही है। केंद्र सरकार की असफल नीति के कारण देश में आज महंगाई चरम पर है और महंगाई के साथ-साथ दवाइयों एवं अस्पतालों में भर्ती मरीजों को भी जीएसटी की मार झेलनी पड़ रही है इस विषम परिस्थिति में आयुष्मान कार्ड से डिलीवरी की सुविधा समाप्त करना घोर अन्याय कारक कार्य है। भाजपा महिला मोर्चा की बहनें छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल जी के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ बेवजह प्रदर्शन करने की नौटंकी करते रहती हैं उन बहनों को केंद्र सरकार से यह मांग करना चाहिए कि आयुष्मान कार्ड में नसबंदी बच्चादानी और डिलीवरी की सुविधा अति शीघ्र प्रदान करे अन्यथा केंद्रीय स्वास्थ मंत्री का या अपने मुखपात्र का पुतला दहन कर विरोध दर्ज कराएं।