राजनांदगांव //कबाड़ी का कारोबार नगर में पुलिस की शह पर चल रहा है। चोरी का सामान खरीदने की बात हो या नियम विरुद्ध टैक्स बकाया या बिना लोन की किस्त दिए वाहनों को कबाडियो के यहां इस कदर टुकड़ों मे तब्दील कर दिया जाता है जिसको पहचानना विक्रेता के बस में नहीं होता । चोरी के वाहनों को या फिर बकाया टैक्स गाड़िया खपाने में सबसे बड़ा योगदान कबाड़ियों का होता है। राजनांदगांव के कंचन बाग क्षेत्र में धड़ल्ले के साथ चल रहा कबाड़ी का दुकान आए दिन नई नई कबाड़ गाड़ियों से घिरा नजार आता है । उस कबाड़ी के यार्ड में जहां कई गाड़ियां कटी हुई है तो कई गाड़ियों का इंजन अलग-अलग निकाल दिया गया है कई गाड़ियों का डिब्बा ही अलग है लेकिन संबंधित थाना क्षेत्र की पुलिस के नजर से बाहर है इस कबाड़ के गोदामों में कटी गाड़ियों का लोहा शोभा बढा रही हैं l

लापरवाह व्यवस्था में बेईमानी के धंधे कितनी सफाई से होते हैं, ये देखना है तो कंचन बाग का कबाड़ी इसका उदाहरण है। यहां कबाड़ के गोदामों में वाहनों के पार्टस देखकर धोखा मत खाना। इन्हें खरीदने की तो सोचना भी मत। क्या पता कि ये चोरी किए गए वाहनों के हों। खरीदे तो फंसना तय है। न यह कारोबार नया है, न इसके कारोबारी। वर्षों से कबाड़ की आड़ में ये काला कारोबार पनप रहा है। टैक्स बकाया के अधिकतर वाहन यहीं खपाए जाते हैं। मौके पर जो गाड़िया खड़ी है उन नबरों को जरा एक नजर देखें आप भी चौक जायेंगे की ऐसे नबर आखिर किस परिवहन विभाग ने जारी किए होंगे वाहनों के नंबर
1.UA 08-G-8179 आल्टो गाडी इसका परिवहन विभाग मे कोई रिकार्ड ही नही हैं अब इसे क्या समझे l
2.CG 07 C 3185 जो की 15 जनवरी 2016 से खत्म हो चुका है ऐसा ही ट्रैक्टर अन्य जिला से ट्रैक्टर अल्टो टाटा 207 स्कॉर्पियो ट्रक का इंजन टैंकर का इंजन टैंकर का चेसिस ट्रक का चेसिस देखने को मिल सकता है l


बकाया टैक्स के वाहन कबाड़ियों के माध्यम से खपाए जा रहे : टैक्स बकाया वाहनों को खपाने का पूरा खेल कुछ कबाड़ियों के माध्यम से हो रहा है। इन कबाड़ियों का नेटवर्क महाराष्ट्र के नागपुर व उत्तर प्रदेश के कई शहरों में फैला है।
ऐसे होता है ये कारोबार : दुर्घटना में क्षतिग्रस्त वाहनों को कबाड़ी खरीद लेते हैं और कागज भी ले लेते हैं। कबाड़ी ने दुर्घटनाग्रस्त बोलेरो खरीद ली। चोरी की बोलेरो भी उसके पास है। कबाड़ी दुर्घटनाग्रस्त बोलेरो के कागज चोरी की बोलेरो के साथ लगा देता है। गाड़ी नंबर बदलने के अलावा इंजन पर अंकित चेसिस नंबर या तो ग्रांइडर से मिटाकर बदल दिए जाते हैं या फिर इंजन ही बदल देते हैं। नया रूप देकर चोरी की गाड़ी बेच दी जाती है। ये गाड़ी उसी व्यक्ति के नाम पर दिखाई जाती है, जिसने उसे कबाड़ी को बेचा था। फिर आरटीओ में सांठगांठ कर गाड़ी को नए खरीदार के नाम पर ट्रांसफर कर दिया जाता है।

आरटीओ से नहीं लेते एनओसी:
दुर्घटनाग्रस्त या कबाड़ वाहन कबाड़ी को बेचने से पहले आरटीओ से एनओसी लेनी पड़ती है। वाहन के कागज जमा करने पर ही एनओसी मिलती है, जिससे वाहन के कागजों का दुरुपयोग न हो। आमतौर पर ऐसा होता नहीं है, जिसका लाभ वाहन चोर और कबाड़ी उठाते हैं। पुराने वाहनों की कबाड़ में खरीदी-बिक्री से पहले पुलिस की एनओसी भी जरूरी है। इससे देखा जाता है कि वाहन किसी अपराध में शामिल तो नहीं है। लेकिन, ऐसा हो नहीं रहा है।

आप भी देखें नियम क्या कहता है
वाहनों को कबाड़ में बेचने से पहले आरटीओ में वाहन का रजिस्ट्रेशन रद कराना होता है। इंजन पर अंकित चेसिस नंबर का हिस्सा निकाल कर दफ्तर में जमा होता है। कबाड़ी को भी रसीद देनी होती है, जिसमें स्पष्ट कहा जाता है कि वाहन का उपयोग परिवहन में नहीं किया जाएगा। तब वाहन स्वामी को एनओसी दी जाती है। इसका डेटा नेशनल पोर्टल में अपडेट होता है। जानकारी के अभाव में वाहन स्वामी रजिस्ट्रेशन रद नहीं कराते, ऐसा नहीं करना चाहिए। और इसी बात का फायदा कबाड़ पर व्यापार करने वाले कबाड़ी जमकर उठा रहा है प्रशासन को चाहिए कि इस तरह गाड़ियों का काटने का काम करने वाले कबाड़ी दुकान पर तत्काल अंकुश लगाए अन्यथा वह दिन दूर नहीं चोरियों की गाड़ी व टैक्स बकाया की गाड़ी इन्हें कबाड़ी के दुकान में दिखाई देगा।


