राजनांदगांव | कुछ डॉक्टरों द्वारा इस्तीफा सौंप दिया गया तो कुछ ने इस्तीफा सौंपने की तैयारी कर ली थी । सरकारी डॉक्टरों को निजी अस्पतालों में प्रैक्टिस नहीं करने शासन के फरमान का एक बार फिर सरकारी डॉक्टरों द्वारा विरोध किया जा रहा है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंप कर इस मामले में लिखित आश्वासन देने की मांग की है। विगत दिनों इस संबंध में आदेश जारी होने पर डॉक्टरों ने इसका विरोध किया था। वहीं कई डॉक्टर सरकारी नौकरी छोड़ कर निजी प्रैक्टिस कर रहे हैं।
शासन ने शासकीय डॉक्टरों को निजी अस्पतालों में प्रैक्टिस नहीं करने को लेकर संबंधित विभाग को दिशा-निर्देश जारी किया है। इससे मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल सहित अन्य सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों में हड़कंप की स्थिति निर्मित हो गई। इस नियम के विरोध में राजनांदगांव के शासकीय अस्पतालों में कार्यरत तकरीबन 20 डॉक्टरों ने सामूहिक इस्तीफा सौंपने की पेशकश कर दी है। वहीं मेडिकल कॉलेज के 20 में 3 डॉक्टरों ने खुद को डॉक्टरों के इस विरोध एवं आंदोलन से अलग कर लिया है। लेकिन जिले के अधिकांश सरकारी डॉक्टर ड्यूटी टाइम के बाद शहर के निजी अस्पतालों में सेवा देते हैं।
कॉलेज के 29 विभाग 30 प्रतिशत डॉक्टरों के भरोसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल में केवल 30 प्रतिशत डॉक्टरों के भरोसे 29 विभाग संचालित किया जा रहा है। पहले से डॉक्टरों की कमी है। सालभर में करीब 18 विशेषज्ञ डॉक्टरों ने इस्तीफा दिया। यहां मेडिसिन, ऑर्थो, गायनिक, आई, कैंसर, सर्जरी, विभाग में पहले से डॉक्टरों की कमी है। जिला अस्पताल में कुछ डॉक्टरों के रिटायर्ड होने से यहां भी डॉक्टरों की कमी है। अब शासन के नए फरमान के चलते और सरकारी डॉक्टरों ने नौकरी छोड़ी तो मरीजों की समस्या बढ़ेगी। मेडिकल कॉलेज में पांच जिलों से मरीज इलाज कराने पहुंचते है।
पहले आश्वासन पर मान गए थे सरकारी डॉक्टर्स विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह व स्वास्थ्य मंत्री ने इन डॉक्टरों से मुलाकात कर उन्हें इस तरह का कोई आदेश लागू नहीं होने का मौखिक आश्वासन दिया था। इस आश्वासन पर डॉक्टर्स मान गए थे। लेकिन अब शासन द्वारा फिर से सख्ती बरतने के चलते डॉक्टरों में नाराजगी है। अब डॉक्टरों ने लिखित आश्वासन की मांग को लेकर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को ज्ञापन सौंपा है।