दमनकारी भूपेश सरकार के खिलाफ महाआन्दोलन की तैयारी में विभिन्न अधिकारी
कर्मचारी संगठन: मधुसूदन यादव
बढ़े हुए दर से डी.ए. का भुगतान ही मिलने से शासकीय सेवकों को पहुॅची लाखो
रूपये की आर्थिक क्षति
पूर्व सांसद एवं प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष मधुसूदन यादव ने आरोप लगाया है
कि विगत साढ़े चार साल से छत्तीसगढ़ सरकार लगातार शासकीय सेवकों का वित्तीय
शोषण करती आ रही है। शासकीय सेवकों के विभिन्न संगठनों एवं संघो से
पूछ-पूछ कर कर्मचारी हित से जुड़े तमाम वायदे अपने चुनावी घोषणापत्र में
शामिल करने वाली कांग्रेस सरकार आज उन्हीं वायदो को भुला बैठी है और इन
संघो और संगठनों से वार्तालाप करने के लिये तैयार तक नहीं है। जबकि ये
संघ और संगठन सरकार से अपने चुनावी वायदो को पूरा करवाने के लिये प्रदेश
में लगातार आंदोलन एवं विरोध प्रदर्शन करते रहे हैं। पूर्व संासद मधु ने
आरोप लगाया कि आजादी के बाद देश के इतिहास में यह पहली बार है कि किसी
राज्य शासन के खिलाफ अधीनस्थ कार्यरत् मानव संसाधन द्वारा इतना अधिक
विरोध प्रदर्शन एवं आंदोलन किया जा रहा है। हाथ में गंगाजल लेकर
नियमितीकरण के झूठे वायदे करने वाली कांग्रेस सरकार के विरोध में आज
प्रदेश में आक्रोश का माहौल व्याप्त है, जो किसी भी वक्त विस्फोटक रूप ले
सकता है। अपने चुनावी घोषणाओं को पूरा करना तो दूर, उल्टे राज्य की
कांग्रेस सरकार समय समय पर केन्द्र शासन के द्वारा बढ़ाये गये डी.ए. की दर
को भी छत्तीसगढ़ में लागू करने में टालमटोल करके शासकीय सेवकों को बढ़े हुए
डी.ए. के रूप में प्राप्त होने वाले करोड़ों रूपये की राशि हड़पने में लगी
है। इसके पूर्ववर्ती भाजपा शासन में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह
जी द्वारा शासकीय सेवकों के हित को ध्यान में रखते हुए केन्द्र शासन के
द्वारा बढ़ाये गये डी.ए. की दर को एरियर्स राशि के रूप में शासकीय सेवकों
को प्रदान किया जाता था, किन्तु इस परिपाटी को राज्य में सत्तासीन
हिटलरशाही कांग्रेस सरकार ने बदल दिया है। राज्य के कई शासकीय कर्मचारी
संगठन यह दावा करते हैं कि केन्द्र शासन के देय तिथि से छत्तीसगढ़ शासन
द्वारा बढ़े हुए दर से डी.ए. का भुगतान नहीं करने के कारण, शासकीय सेवकों
को पिछले साढ़े चार सालों में लाखो रूपये की आर्थिक क्षति पहुॅची है।
पूर्व सांसद मधु ने आरोप लगाया है कि कर्मचारी विरोधी कांग्रेस सरकार ने
प्रदेश के छोटे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से लेकर बड़े अधिकारियों तक के
कैडर के शासकीय सेवकों का हक मारा है, जिसके कारण विगत वर्षो में गॉव से
लेकर शहर तक नियमित, अनियमित, संविदा, दैनिक वेतन भोगी अधिकारियों
कर्मचारियों ने राज्य शासन के खिलाफ आंदोलन किया है। उन्होंने ने भूपेश
सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि विगत वर्षो में राज्य शासन विभिन्न आधिकारी
एवं कर्मचारी संगठनों के आंदोलनों का नाना प्रकार के हथकंडे अपना कर दमन
करती रही है, जिसके कारण इस संगठनों को अपनी प्रमुख मांगों को मनवाने में
सफलता प्राप्त नहीं हुई और उन्हें शासन के जुल्मों के आगे विवश होकर अपना
आंदोलन समाप्त करना पड़ा है। भाजपा नेता मधु ने उदाहरण देते हुए बताया कि
विगत वर्षो में राज्य में पटवारी, शिक्षक, नर्सिंग स्टाफ, एस.डी.एम.,
तहसीलदार, मंत्रालयीन कर्मचारी, वन विभाग, लिपिक, भृत्य, सफाई कर्मचारी,
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, धान खरीदी केन्द्र के समिति प्रबंधक, मध्यान्ह भोजन
रसोईया, सरपंच, ग्राम सचिव, कोटवार सहित तमाम नियमित एवं अनियमित,
संविदा, दैनिकवेतनभोगी आदि सेवा में नियोजित अधिकारी कर्मचारी संगठनो ने
आंदोलन किया है किन्तु राज्य शासन द्वारा जोर जबरदस्तीपूर्वक कभी एस्मा
लगाकर,, तो कभी सेवा समाप्ति या विभागीय दण्डात्मक कार्यवाही का डर
दिखाकर और कभी कर्मचारी संगठनों में फूट डालकर, राज्य सरकार के विरूद्ध
ऐसे आंदोलनों का दमन किया जाता रहा है जिससे राज्य में अराजकता का माहौल
निर्मित है। प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष मधु ने चेतावनी देते हुए कहा है कि
साढ़े चार सालों से भूपेश सरकार की तानाशाही नीतियों को मजबूरीवश मौन होकर
झेल रहे राज्य के नियमित एवं अनियमित शासकीय सेवकों की बारी अब आ चुकी
है। यदि आज भी कांग्रेस सरकार ने पूर्ववत् कर्मचारी संघों एवं संगठनों से
दूरी बनाकर संवादहीनता कि स्थिति कायम रखी, तो इसके गंभीर परिणाम
परिलक्षित होंगे। प्रदेश केे ये विभिन्न अधिकारी-कर्मचारी संगठन जो अब
अपने हक की मांग को लेकर आरपार की लड़ाई लड़ने की मानसिकता बना चुके हैं,
वो आनेवाले दिनों में एकजुट होकर दमनकारी भूपेश सरकार के विरूद्ध एक
महाआन्दोलन का शंखनाद करेंगे और इस कर्मचारी विरोधी भूपेश सरकार से अपना
हक हरहाल में लेकर रहेंगे।