बसंतपुर स्थित जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति तो हो गई है पर यहां गर्भवतियों की सोनोग्राफी नहीं हो पा रही है। जांच के लिए आने वाली गर्भवतियों को बाहर भेजा जा रहा है। प्राइवेट सेंटर में सोनोग्राफी कराना भारी पड़ रहा है। प्राइवेट संस्थानों में एक हजार से 15 सौ तक वसूल रहे हैं।
मजबूरी में लोग महंगे दर पर जांच करा रहे हैं। बताया गया कि हाल ही में नियुक्त रेडियोलॉजिस्ट के पास स्वास्थ्य संचालनालय से गर्भवतियों की सोनोग्राफी करने परमिशन नहीं मिला है। इसके लिए अस्पताल प्रबंधन की ओर से ऑनलाइन आवेदन कर परमिशन मांगा गया है। प्रबंधन का कहना है कि शासन स्तर से जल्द अनुमति मिल जाएगी। इसके बाद जांच की सुविधा देंगे।
हालांकि गर्भवतियों को छोड़कर जिला अस्पताल में अन्य जांच शुरू कर दिए गए हैं और इसकी रिपोर्ट भी मिल रही है। गर्भवतियों को समय-समय पर जांच करानी होती है। कई तरह की परेशानी आने पर डॉक्टर सोनोग्राफी की सलाह देते हैं। इसलिए गर्भवतियों को सोनोग्राफी करनी पड़ती है। इसके लिए मजबूरी में उन्हें निजी सेंटरों में जाना पड़ता है। जहां पर अधिक फीस देकर सोनोग्राफी करा रही हैं।
जांच कराने पहुंच रहीं गरीब तबके की महिलाएं
ज्यादातर गरीब तबके की महिलाएं जिला अस्पताल में ही जांच कराने पहुंच रहीं हैं पर परमिशन का रोड़ा बताकर मायूस लौटा दिया जा रहा है। जबकि गायनिक डिपार्टमेंट के डॉक्टर महिलाओं को सोनोग्राफी कराने की सलाह दे रहे हैं। जिला अस्पताल में जांच नहीं होने पर महिलाओं को प्राइवेट सेंटर में जाना पड़ रहा है।
प्रसव कराने मजबूरी में बाहर जाना पड़ रहा
यहां तक प्रसव कराने के लिए भर्ती हुई महिलाओं को भी मजबूरी में बाहर ही जाना पड़ रहा है। सिविल सर्जन डॉ. केके जैन ने बताया कि गर्भवतियों की सोनोग्राफी के लिए राज्य स्तर पर परमिशन लेना पड़ता है। आवेदन कर चुके हैं और जल्द ही आवेदन मिलने की उम्मीद है। इसके बाद गर्भवतियों की भी सोनोग्राफी यहीं कर सकेंगे।