जिले में मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल का संचालन 7 साल से हो रहा है पर अब तक यहां सबसे महत्वपूर्ण न्यूरो सर्जरी डिपार्टमेंट में एक भी एक्सपर्ट की नियुक्ति नहीं हो पाई है। यह डिपार्टमेंट केवल कागजों में ही संचालित हो रहा है। इतने बड़े जिले के सरकारी हॉस्पिटल में न्यूरो सर्जन नहीं होने से हेड इंजरी के सारे केस रायपुर रेफर किए जा रहे हैं।
घायलों की सीटी स्कैन रिपोर्ट देखते ही अस्पताल प्रबंधन हाथ खड़े कर दे रहा है और हर माह हेड इंजरी वाले 30 से 40 मरीज बाहर भेज दिए जा रहे हैं। स्थिति यह है कि रेफर होने पर कई गंभीर मरीजों की रास्ते मेंं ही मौत हो जा रही है।
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि न्यूरो सर्जन नहीं होने की वजह से सिर पर चोट लगने वाले घायलों को यहां रखकर रिस्क नहीं उठाया जाता बल्कि तत्काल हायर सेंटर भेज देते हैं। जिले में 2014 जून से मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल का संचालन हो रहा है। पहले बसंतपुर स्थित पुराने भवन में संचालित था।
जिलेभर के केस आ रहे
ब्लॉक स्तर पर दुर्घटना में घायल हुए मरीजों को सीधे यहीं भेजा जाता है। घायलों को प्राथमिक उपचार करने के बाद डॉक्टरों की सलाह पर परिजन मरीजों की सीटी स्कैन कराते हैं। सीटी स्कैन रिपोर्ट में अगर सिर पर खून का थक्का जमने, या फिर नसों से जुड़ी समस्या होने पर रेफर कर देते हैं।
यहां सुविधा भी नहीं
जिला अस्पताल में भी न्यूरो सर्जन नहीं है। मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल से पहले यहां जिला अस्पताल का ही संचालन हो रहा था। जिला अस्पताल में भी कभी न्यूरो सर्जन की पोस्टिंग ही नहीं की गई। यहां से भी हेड इंजरी के केस रेफर कर दिए जा रहे हैं। मरहम,पट्टी के बाद एमसीएच भेज देते हैं।
सड़क हादसे भी बढ़ रहे
ट्रैफिक शाखा के अफसरों की मानें तो सड़क दुर्घटना के केस बढ़ रहे हैं। 2020 की तुलना में 2021 में दुर्घटना के मामले बढ़े हैं। इनमें से ज्यादातर घायलों के सिर पर चोटें लगी हैं। इनमें 1.21 प्रतिशत हादसे में वृद्धि हुई है तो वहीं 10.26 फीसदी मौत के मामले सामने आएं हैं।
यह कहकर बाहर भेज रहे
ऐसे मरीजों के परिजनों को अस्पताल प्रबंधन की ओर ये यह कहकर रेफर कर दिया जाता है कि अगर ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है तो फिर यहां कुछ नहीं हो पाएगा। इसलिए मजबूर होकर परिजन घायल मरीजों को दूसरे शहर के प्राइवेट या फिर सरकारी हॉस्पिटल में भर्ती कराने मजबूर हो जाते हैं। हेड इंजरी के केस में बाहर इलाज कराना भारी भी पड़ता है।
कई बार लिख चुके पत्र
मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ प्रदीप बेक ने बताया कि न्यूरो सर्जरी डिपार्टमेंट तो है पर न्यूरो सर्जन ही नहीं है। रायपुर में डीकेएस हॉस्पिटल में न्यूरो सर्जरी डिपार्टमेंट है। एमसीएच में न्यूरो सर्जन की पोस्टिंग के लिए शासन स्तर पर कई बार पत्राचार कर चुके हैं। न्यूरो सर्जन के अभाव में मजबूरी में रेफर करते हैं।
सड़क दुर्घटना के ऐसे केस रोज आ रहे सामने
केस-1: पार्रीनाला के पास हुई सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए एक छात्र को मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल से रेफर कर दिया गया। सिर पर चोट लगी थी। परिजनों ने भिलाई के प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराया था जहां छात्र ने दम तोड़ दिया।
केस-2: अग्रवाल पेट्रोल पंप के पास एक बोलेरो चालक ने शहर के युवक को ठोकर मारी। सिर पर गंभीर चोट लगी थी। मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में भर्ती कराने पर पता चला कि यहां न्यूरो सर्जन नहीं है। कुछ देर के बाद युवक की मौत हो गई।
केस-3: खैरागढ़ क्षेत्र में बाजार अतरिया के पास दुर्घटना में घायल हुए एक शिक्षक को परिजनों ने एमसीएच में भर्ती कराया था। डॉक्टरों ने सीटी स्कैन की रिपोर्ट देखने के बाद इलाज से हाथ खड़े कर दिए और रेफर कर दिया गया।