मत्स्य उत्पादन को बढ़ाने उद्देश्य से 18 मई को मटियामोती जलाशय में एक पेनकल्चर प्रदर्शन कार्यक्रम हुआ। इस विधि से अब मत्स्य का उत्पादन जलाशय के किनारों पर घेरे कर किया जा सकता है। संचयन में खर्च की जा रही वर्तमान राशि की अपेक्षा कम लागत में हो सकती है।
मास्त्यिकी अनुसंधान बैरकपुर सिफरी के वैज्ञानिक सतीश कौशलेश और मत्स्य पालन विभाग राजनांदगांव के सहायक संचालक गीताजंली गजभिये ने जलाशय में स्थापित पेन में मछली के बीज छोड़ा। ग्राम सरपंच गोपाल भुवार्य, रोहित कुमार गोपी कुमार ने भी मटियामोती जलाशय में मत्स्य उत्पादन को बढ़ाने के लिए चलाए जा रही योजनाओं का समर्थन किया। कार्यक्रम में 31 आदिवासी लाभार्थी व हितग्राही उपस्थित थे।
मास्त्यिकी अनुसंधान बैरकपुर सिफरी ने मत्स्य विभाग के माध्यम से समिति को पेन विधि के क्रियान्वयन के लिए दो एफआरपी कोराकल, एक इंजन सहित नाव, दो टन मत्स्य आहार एवं 113 मीटर के दो एचपी ई पेन सामग्री प्रदान की गई। कार्यक्रम का संचालन संदीप साहू ने किया।