बिलासपुर। हाई कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत राज्यपाल मूलभूत अधिकार को कम नहीं कर सकते हैं। संविधान ने सभी नागरिकों को समान रूप से रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं। इस अधिकार को अनुसूची पांच के तहत कम नहीं किया जा सकता है। डिवीजन बेंच ने कहा कि विशेष परिस्थिति में आवश्यक हो तो संसद ही अनुच्छेद 16(3) के तहत निवास के आधार पर आरक्षण दे सकती है। राज्य शासन या राज्यपाल को यह अधिकार नहीं है। इसके साथ डिवीजन बेंच ने कोरबा जिले के अलावा सरगुजा व बस्तर संभाग में स्थानीय निवासियों को ही तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नियुक्ति देने राज्यपाल द्वारा जारी अधिसूचना को रद कर दिया है। चीफ जस्टिस एके गोस्वामी व जस्टिस गौतम चौरड़िया की डिवीजन बेंच ने नियुक्ति प्रक्रिया पर लगी रोक भी हटा दी है।
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल ने 17 जनवरी 2012 को अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत कोरबा जिले और बस्तर व सरगुजा संभाग में स्थानीय निवासियों की ही तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नियुक्ति दी जा रही थी। तीनों जगह सहायक शिक्षकों की नियुक्ति पर लगी रोक को हाई कोर्ट ने हटा दिया है। इससे करीब 2,700 सहायक शिक्षकों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। सुशांत शेखर धराई एवं उमेश श्रीवास ने वकील अजय श्रीवास्तव के जरिए बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर कर राज्य शासन द्वारा जारी अधिसूचना को चुनौती दी थी। याचिका के अनुसार छत्तीसगढ़ के राज्यपाल द्वारा 17 जनवरी 2012 को संविधान की पांचवीं अनुसूची में दी गई शक्ति का प्रयोग करते हुए बस्तर व सरगुजा संभाग व कोरबा जिले के लिए तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों के लिए स्थानीय निवासियों की भर्ती का आदेश जारी किया था।
इस आदेश को राज्य शासन ने वर्ष 2023 तक बढ़ा दिया है। याचिकाकर्ता ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 16 के तहत राज्य के किसी भी नागरिक के साथ धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास एवं लिंग के आधार पर नौकरी में विभेद नहीं किया जा सकता। प्रत्येक नगरिक को राज्य में नियुक्ति प्रक्रिया में भाग लेने का समान अधिकार है। यदि निवास के आधार पर विशेष परिस्थिति में आरक्षण करना है तो यह अधिकार मात्र संसद को है। याचिकाकर्ता ने राज्यपाल द्वारा जारी अधिसूचना को असंवैधानिक बताया है। राज्य शासन की ओर से पैरवी करते हुए विधि अधिकारियों ने कहा कि संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत आरक्षण देने एवं अनुसूचित क्षेत्र के विकास के लिए राज्यपाल व राज्य शासन इस तरह का निर्णय ले सकते हैं।सहायक शिक्षकों की भर्ती के लिए 19 मार्च 2019 को विज्ञापन जारी किया गया था। इसमें प्रदेशभर के अभ्यर्थियों ने आवेदन जमा किया था। जनवरी 2020 में राज्य शासन ने परिपत्र का हवाला देते हुए कोरबा जिले के अलावा बस्तर व सरगुजा संभाग के स्थानीय निवासियों को ही नियुक्ति देने के संबंध में हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने सहायक शिक्षकों की नियुक्ति पर रोक लगा दी थी। इसे चुनौती देते हुए अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी थी। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस एके गोस्वामी व जस्टिस गौतम चौरड़िया की डिवीजन बेंच में हुई। प्रकरण की सुनवाई के बाद राज्यपाल द्वारा जारी अधिसूचना को खारिज करने के साथ ही नियुक्ति प्रक्रिया पर लगी रोक को भी हटा दिया है।