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MP : डिलेवरी के दौरान लापरवाही से बच्चे को लाइलाज बीमारी , अस्पताल और डाक्टर को 50 लाख का देना होगा मुआवजा

डिलेवरी के समय की गई लापरवाही के कारण 16 साल का बच्चा लाइलाज बीमारी सेरेब्रल पाॅल्सी बीमारी से पीडि़त है। उसके शरीर का भी संतुलित विकास नहीं हो पाया। उपभोक्ता फोरम ने इस मामले में अस्पताल और डाक्टर पर 50 लाख का मुआवजा देने के आदेश दिए है।

फोरम में केस 15 साल तक चला। वर्ष 2006 में गर्भवती आकृति बंसल का इलाज सीएचएल अस्पताल में हुआ था। डाॅ.नीना अग्रवाल उनका इलाज कर रही थी। 9 माह पूरे होने पर आकृति को अस्पताल में भर्ती किया गया, प्रवस के समय स्पेशल डाक्टर लेबर रुम में नहीं थे।

डिलेवरी के दौरान बच्चा फंस गया तो वेक्यूम उपकरण के जरिए खींचा गया। इसके लिए परिजनों की लिखित अनुमति लेना होती है, लेकिन वह नहीं ली गई। प्रसव के समय आक्सीजन सिलेंडर भी नहीं था। जब शिशु बाहर निकला तो वह नहीं रोया।

नर्स आईसीयू में आक्सीजन सिलेंडर लेने गई। इसमें दो से तीन मिनट का समय लग गया। बच्चे के दिमाग तक आक्सीजन नहीं पहुंच पाई और चिमटे से खींचने के कारण सिर पर खून का थक्का भी जम गया था। इस कारण बच्चे को सेरेब्रल पाॅल्सी बीमारी हो गई, जो लाइलाज है।

फोरम ने आदेश में कहा कि सोनोग्राफी में बच्चा ठीक दिख रहा था। रिपोर्ट भी सामान्य थी, लेकिन जन्म के बाद उसमें बदलाव हुआ। प्रकरण में मेडिकल बोर्ड भी गठित किया गया, लेकिन अस्पताल और डाक्टर की तरफ से खुद को निर्दोष साबित करने के लिए कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए।

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