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नोएडा में आवारा कुत्तों का आतंक: 7 महीने में 73,754 लोगों को काटा, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शेल्टर होम्स की तैयारी तेज

नोएडा में आवारा और पालतू कुत्तों के काटने की घटनाएं चिंता का सबब बन गई हैं। जिला प्रशासन के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 के पहले सात महीनों में गौतमबुद्ध नगर में 73,754 लोगों को आवारा कुत्तों ने काटा है। वहीं, पालतू कुत्तों ने भी 24,856 लोगों को अपना शिकार बनाया। इस बढ़ते खतरे को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नोएडा प्राधिकरण ने आवारा कुत्तों के लिए सर्वे और शेल्टर होम्स बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। आइए, इस मुद्दे को विस्तार से समझते हैं और जानते हैं कि नोएडा में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

सात महीनों में 73,754 कुत्तों के काटने के मामले

जिला प्रशासन के आंकड़े बताते हैं कि जनवरी से जुलाई 2025 तक आवारा कुत्तों ने 73,754 लोगों को काटा। महीने-दर-महीने आंकड़ों पर नजर डालें तो:

  • जनवरी: 9,383 मामले
  • फरवरी: 10,175 मामले
  • मार्च: 11,599 मामले
  • अप्रैल: 10,925 मामले
  • मई: 10,646 मामले
  • जून: 10,646 मामले
  • जुलाई: 10,394 मामले

इन आंकड़ों से साफ है कि हर महीने औसतन 10,000 से ज्यादा लोग कुत्तों के हमले का शिकार बन रहे हैं। यह स्थिति नोएडा के निवासियों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए डर का माहौल पैदा कर रही है।

पालतू कुत्तों ने भी बढ़ाई चिंता

आवारा कुत्तों के साथ-साथ पालतू कुत्तों के काटने की घटनाएं भी कम नहीं हैं। सात महीनों में 24,856 लोगों को पालतू कुत्तों ने काटा, जिनमें जुलाई में 5,567 मामले दर्ज किए गए। महीने-दर-महीने आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • जनवरी: 3,124 मामले
  • फरवरी: 4,662 मामले
  • मार्च: 2,463 मामले
  • अप्रैल: 3,267 मामले
  • मई: 2,958 मामले
  • जून: 2,815 मामले
  • जुलाई: 5,567 मामले

इन घटनाओं ने पालतू कुत्तों के मालिकों की जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े किए हैं।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश: शेल्टर होम्स में भेजे जाएंगे आवारा कुत्ते

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर सख्त आदेश जारी किया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम्स में भेजा जाए, जहां उनके रहने, खाने और इलाज की उचित व्यवस्था हो। इस आदेश के बाद नोएडा प्राधिकरण ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। प्रारंभिक सर्वे में शहर में करीब 50,000 आवारा कुत्तों की मौजूदगी का पता चला है। बाकी सर्वे का काम गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को सौंपा जाएगा।

नोएडा में मौजूदा और नए शेल्टर होम्स

नोएडा प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम ने बताया कि वर्तमान में शहर में चार डॉग शेल्टर मौजूद हैं:

  • सेक्टर-34
  • सेक्टर-50
  • फेज-2
  • सेक्टर-93

इनमें से सेक्टर-34 और सेक्टर-93 के शेल्टरों में कुत्तों को रखा जा रहा है। इसके अलावा, सेक्टर-94 में एक एनिमल शेल्टर भी है, जहां बीमार पशुओं का इलाज किया जाता है। भविष्य में नोएडा के बाहरी इलाकों में बड़े और आधुनिक शेल्टर होम्स बनाने की योजना है। इसके लिए जमीन चिन्हित करने का काम शुरू हो चुका है। इन शेल्टरों में पशु चिकित्सकों की नियुक्ति होगी और कुत्तों की फीडिंग व देखभाल के लिए एनजीओ की मदद ली जाएगी।

पालतू कुत्तों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य

पालतू कुत्तों के बढ़ते हमलों को देखते हुए नोएडा प्राधिकरण ने सख्त डॉग पॉलिसी लागू की है। इसके तहत सभी पालतू कुत्तों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है। अब तक 8,169 पालतू कुत्तों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। अगर कोई पालतू कुत्ता किसी को काटता है, तो मालिक पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। यह कदम पालतू कुत्तों के मालिकों को जिम्मेदार बनाने के लिए उठाया गया है।

क्यों बढ़ रहे हैं कुत्तों के हमले

विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी, भोजन और पानी की कमी, और अनियंत्रित प्रजनन के कारण आवारा कुत्तों में आक्रामकता बढ़ रही है। इसके अलावा, कुछ पालतू कुत्तों को ठीक से प्रशिक्षित न करने और गलत नस्लों को अपनाने से भी ये घटनाएं बढ़ रही हैं। नोएडा प्राधिकरण और स्वास्थ्य विभाग ने हॉटस्पॉट्स की पहचान की है, जहां कुत्तों के हमले ज्यादा हो रहे हैं। इन क्षेत्रों में टीकाकरण और नसबंदी अभियान तेज किए जा रहे हैं।

क्या करें निवासी

नोएडा के निवासियों को सलाह दी जा रही है कि वे आवारा कुत्तों से सावधान रहें और काटने की स्थिति में तुरंत मेडिकल मदद लें। पालतू कुत्तों के मालिकों को अपने पालतू जानवरों को प्रशिक्षित करने और उनका रजिस्ट्रेशन कराने की सलाह दी गई है। साथ ही, बच्चों और बुजुर्गों को अकेले उन इलाकों में जाने से बचना चाहिए जहां कुत्तों की मौजूदगी ज्यादा है।

नोएडा में कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाएं एक गंभीर समस्या बन चुकी हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश और नोएडा प्राधिकरण की त्वरित कार्रवाई से उम्मीद है कि जल्द ही इस स्थिति पर काबू पाया जाएगा। शेल्टर होम्स और नसबंदी अभियान इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। निवासियों को भी जागरूक और सावधान रहने की जरूरत है ताकि ऐसी घटनाओं को कम किया जा सके।

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