आज का पंचांग 28 अगस्त 2025: ऋषि पंचमी व्रत, गणेश चतुर्थी और शुभ-अशुभ मुहूर्त

दोस्तों, आज 28 अगस्त 2025, गुरुवार का दिन खास है क्योंकि आज ऋषि पंचमी व्रत है। साथ ही, गणेश चतुर्थी के उत्सव का माहौल भी शुरू हो चुका है। पंचांग के हिसाब से आज चित्रा नक्षत्र सुबह 8:44 बजे तक रहेगा, फिर स्वाति नक्षत्र शुरू होगा। अगर आप पूजा-पाठ या कोई शुभ काम करने की सोच रहे हैं, तो आज के शुभ और अशुभ मुहूर्त जानना जरूरी है। आइए, आज का पंचांग डीटेल में देखते हैं। हमने जानकारी को वैदिक पंचांग और ज्योतिषीय स्रोतों से चेक किया है, और ये डिटेल्स सटीक हैं।
आज का पंचांग: 28 अगस्त 2025
- तारीख और संवत: राष्ट्रीय मिति भाद्रपद 06, शक संवत 1947, विक्रम संवत 2082, सौर भाद्रपद मास 13, हिजरी 1447, अंग्रेजी तारीख 28 अगस्त 2025।
- तिथि: पंचमी तिथि शाम 5:57 बजे तक, फिर षष्ठी तिथि शुरू।
- नक्षत्र: चित्रा नक्षत्र सुबह 8:44 बजे तक, फिर स्वाति नक्षत्र।
- योग: शुक्ल योग दोपहर 1:18 बजे तक, फिर ब्रह्म योग।
- करण: बालव करण शाम 5:57 बजे तक, फिर कौलव करण।
- चंद्रमा: दिन-रात तुला राशि में रहेगा।
- ऋतु और गोल: शरद ऋतु, सूर्य दक्षिणायन, उत्तर गोल।
- व्रत-त्योहार: ऋषि पंचमी व्रत, गणेश चतुर्थी उत्सव का माहौल।
सूर्योदय और सूर्यास्त
- सूर्योदय: सुबह 5:56 बजे
- सूर्यास्त: शाम 6:48 बजे
आज के शुभ मुहूर्त
पूजा, विवाह, या कोई शुभ काम शुरू करने के लिए ये समय बेस्ट हैं:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:28 बजे से 5:12 बजे तक – ध्यान और पूजा के लिए शानदार समय।
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:30 बजे से 3:22 बजे तक – नए काम शुरू करने के लिए अच्छा।
- निशीथ काल: रात 12:00 बजे से 12:45 बजे तक – मंत्र जाप और आध्यात्मिक कार्यों के लिए।
- गोधूलि बेला: शाम 6:47 बजे से 7:09 बजे तक – पूजा और हवन के लिए शुभ।
- अमृत काल: सुबह 5:57 बजे से 7:33 बजे तक – किसी भी शुभ काम के लिए उत्तम।
आज के अशुभ मुहूर्त
इन समय में कोई शुभ काम शुरू करने से बचें:
- राहुकाल: दोपहर 1:30 बजे से 3:00 बजे तक – इस दौरान यात्रा, नए काम या खरीदारी न करें।
- गुलिक काल: सुबह 9:00 बजे से 10:30 बजे तक – छोटे-मोटे काम ठीक, पर बड़े फैसले टालें।
- यमगंड काल: सुबह 6:00 बजे से 7:30 बजे तक – विवाद या जोखिम वाले काम न करें।
- दुर्मुहूर्त काल: सुबह 10:14 बजे से 11:05 बजे तक – इस समय शुभ कार्य टालें।
आज का खास: ऋषि पंचमी व्रत
ऋषि पंचमी का व्रत खास तौर पर सप्तऋषियों की पूजा और पवित्रता के लिए रखा जाता है। इस दिन महिलाएं विशेष रूप से व्रत रखती हैं और अरुंधती सहित सप्तऋषियों की पूजा करती हैं। सुबह स्नान के बाद साफ कपड़े पहनकर, पूजा स्थल पर सप्तऋषियों की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। धूप, दीप, फूल और फल अर्पित करें। व्रत में अनाज और नमक से परहेज करें, फल और दूध लें। ये व्रत पापों से मुक्ति और आध्यात्मिक शुद्धि के लिए माना जाता है। कुछ ज्योतिषीय स्रोतों में बताया गया कि इस साल गणेश चतुर्थी की शुरुआत भी पंचमी तिथि से हो रही है, जो उत्सव का माहौल बढ़ाता है।
पूजा और शुभ काम के लिए टिप्स
- शुभ नक्षत्र: चित्रा और स्वाति नक्षत्र आज रचनात्मक और व्यापारिक कामों के लिए अच्छे हैं।
- तुला राशि का प्रभाव: चंद्रमा तुला में होने से आज का दिन कला, सौंदर्य और रिश्तों से जुड़े कामों के लिए शानदार है।
- गणेश चतुर्थी का माहौल: गणेश पूजा के लिए गोधूलि बेला में गणपति स्थापना और मंत्र जाप करें।
- अगर आप ज्योतिषीय सलाह चाहते हैं, तो अपने पंडित जी से संपर्क करें, खासकर राहुकाल से बचने के लिए।
क्यों खास है आज का दिन?
ऋषि पंचमी और गणेश चतुर्थी का कॉम्बिनेशन आज के दिन को आध्यात्मिक और उत्सवी बनाता है। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में पूजा या ध्यान करें, और दोपहर में विजय मुहूर्त में नए प्रोजेक्ट्स शुरू करें। राहुकाल में सावधानी बरतें, ताकि आपका दिन मंगलमय रहे।






