धर्म-कर्म

Pitru Paksha 2025: कब शुरू होंगे श्राद्ध, क्यों है पितरों का तर्पण इतना खास महत्व जानें

सनातन धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। ये वो पवित्र समय है जब हम अपने पूर्वजों को याद करते हैं, उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं और उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। हर साल आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से अमावस्या तक 15 दिन पितरों को समर्पित होते हैं। मान्यता है कि इस दौरान हमारे पूर्वज पृथ्वी पर आते हैं और अपने वंशजों द्वारा किए गए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान को स्वीकार करते हैं। आइए, जानते हैं कि पितृ पक्ष 2025 कब शुरू हो रहा है और इसका महत्व क्या है।

पितृ पक्ष क्या है

पितृ पक्ष, जिसे श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है, वो समय है जब हम अपने उन प्रियजनों को श्रद्धांजलि देते हैं जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। इन 15 दिनों में पितरों की आत्मा अपने परिवार के पास आती है और उनके द्वारा किए गए श्राद्ध कर्मों से उन्हें शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह समय हमें अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर देता है।

कब शुरू होगा पितृ पक्ष 2025

इस साल पितृ पक्ष की शुरुआत भाद्रपद पूर्णिमा से हो रही है, जो 27 अगस्त 2025 को होगी। इस दिन उन पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है जिनका निधन पूर्णिमा तिथि को हुआ था। इसके बाद, 28 अगस्त 2025 से आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा शुरू होगी, और अगले 15 दिनों तक हर तिथि के अनुसार श्राद्ध कर्म किए जाएंगे। पितृ पक्ष का समापन 11 सितंबर 2025 को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा।

महत्वपूर्ण तिथियां:

  • भाद्रपद पूर्णिमा श्राद्ध: 27 अगस्त 2025
  • प्रतिपदा श्राद्ध: 28 अगस्त 2025
  • सर्वपितृ अमावस्या: 11 सितंबर 2025

श्राद्ध और तर्पण का महत्व

श्राद्ध का मतलब है श्रद्धा से किया गया कार्य’। ये वो कर्म हैं जो हम अपने पितरों के लिए पूरे मन से करते हैं। इस दौरान विशेष भोजन तैयार किया जाता है, जिसे पितरों को अर्पित किया जाता है। तर्पण में जल, तिल, और कुश के साथ पितरों को प्रणाम किया जाता है। मान्यता है कि इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और वे अपने परिवार को सुख, समृद्धि और दीर्घायु का आशीर्वाद देते हैं।

पितृ पक्ष में किए गए श्राद्ध से पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है। अगर किसी की कुंडली में पितृ दोष हो, तो इस दौरान श्रद्धापूर्वक किए गए कर्म उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। इसके अलावा, दान-पुण्य, गरीबों को भोजन और वस्त्र दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और परिवार में खुशहाली आती है।

पितृ पक्ष में क्या करें

  1. श्राद्ध और तर्पण: अपने पितरों की तिथि के अनुसार श्राद्ध करें। अगर आपको तिथि नहीं पता, तो सर्वपितृ अमावस्या पर सभी पूर्वजों का श्राद्ध किया जा सकता है।
  2. पवित्र भोजन: पितरों के लिए सात्विक भोजन बनाएं, जैसे खीर, पूड़ी, सब्जी, और दाल। इसे कौवों, गायों या गरीबों को दान करें।
  3. दान-पुण्य: कपड़े, भोजन, या धन का दान करें। यह पितरों को प्रसन्न करता है।
  4. पवित्रता बनाए रखें: श्राद्ध कर्म के दौरान शुद्धता और सात्विकता का विशेष ध्यान रखें। मांस-मदिरा का सेवन न करें।
  5. पितरों को याद करें: अपने पूर्वजों को श्रद्धा से याद करें और उनके लिए प्रार्थना करें।

पितृ पक्ष की मान्यताएं

हिंदू धर्म में ऐसा माना जाता है कि पितृ पक्ष के दौरान पितर अपने परिवार की भलाई के लिए धरती पर आते हैं। अगर उनके लिए श्राद्ध और तर्पण सही तरीके से किया जाए, तो वे प्रसन्न होकर परिवार को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। वहीं, अगर पितरों की अनदेखी की जाए, तो पितृ दोष के कारण जीवन में परेशानियां आ सकती हैं।

क्यों खास है पितृ पक्ष 2025

इस साल पितृ पक्ष की शुरुआत भाद्रपद पूर्णिमा से हो रही है, जो अपने आप में विशेष है। इस दिन श्राद्ध करने से उन पितरों को शांति मिलती है जिनका देहांत पूर्णिमा तिथि को हुआ था। इसके अलावा, इस साल पितृ पक्ष का समापन सर्वपितृ अमावस्या पर होगा, जो सभी पितरों के लिए श्राद्ध करने का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है।

पितृ पक्ष 2025 हमें अपने पूर्वजों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का सुनहरा अवसर देता है। यह समय न केवल उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने का है, बल्कि उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को और बेहतर बनाने का भी है। तो, इस पितृ पक्ष में श्रद्धा और विश्वास के साथ अपने पितरों को याद करें, तर्पण करें और दान-पुण्य के कार्य करें। इससे न केवल आपके पितर प्रसन्न होंगे, बल्कि आपके परिवार में भी सुख-शांति का वास होगा