कोण्डागांव : जीवन रक्षक मास्क बनाने में जुटी कोरोना योद्धा महिलाऐं : बिहान समूह की महिलाओं का एक और सराहनीय कार्य

कोविड-19 से जहां एक ओर दुनिया भयभीत है और लोग घरों में बंद है वही कुछ लोग सड़कों पर उतर कर लोगों की जान बचाने के लिए लगातार काम कर रहें हैं जिन्हें आज कोरोना वारियर के नाम से जानते हैं। इनमें मैदानी रूप में कार्य कर रहे डॉक्टर्स और पुलिस वालों एवं प्रशासन के अलावा कुछ अन्य लोग भी हैं, जो पर्दे के पीछे से इस कार्य मे इनका साथ दे रहे हैं। इनमें से एक है मास्क निर्माण करने वाले ‘बिहान‘ महिला स्वसहायता समूह की महिलाएं जो कोण्डागांव में कोरोना वॉरियर की तरह इस आपदाकाल मे मास्क की निर्बाध आपूर्ति जिले में कर रहीं हैं। आज इस कार्य से 200 से अधिक महिलाये जुड़ी हुई हैं ल और लगातार मॉस्क का निर्माण कर रही हैं।
जिला प्रशासन से मिली मदद
कोरोना के संकट के बढ़ने के साथ जिले में मास्क की किल्लत शुरू हो गयी थी। मास्क आपूर्ति के लिए सभी दुकानें रायपुर से आने वाले उत्पादों पर निर्भर थी परन्तु महामारी के डर पसरने के साथ ही मास्क की आपूर्ति भी बंद हो गयी। इस स्थिति का संज्ञान लेते हुए जिला कलेक्टर नीलकण्ठ टीकाम ने संबंधित अधिकारियों को इस कार्य से स्व-सहायता समूहों को जोड़ने के निर्देश दिए। जिसपर जिला पंचायत सीईओ डी एन कश्यप द्वारा प्रत्येक जनपद में सभी महिलाएं जिन्हें सिलाई मशीन शासन द्वारा प्राप्त है या जिनके पास स्वयं की सिलाई मशीन है उनसे चर्चा कर उन्हें इस अभियान से जुड़ कर लाभ उठाने को प्रेरित किया। इसके लिए शुरुआत में सामग्री जैसे कपड़े, पट्टियां आदि उपलब्ध कराया गया।
कार्ययोजना के अनुसार किया कार्य
मास्क उत्पादन का कार्य इतने वृहद पैमाने पर कराना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था। सभी समूहों एवं प्रशासन के मध्य वृहद पैमाने पर उत्पादन के लिए एक सक्षम व्यवस्था के निर्माण के लिए जिला सीईओ ने इसका जिम्मेदारी जिला बिहान मिशन प्रबन्धक विनय सिंह को दी। इस पर उन्होंने मास्क निर्माण को 3 स्तरों में विभाजित किया जिसमें सबसे आधार इकाई ग्राम स्तर पर ग्राम संगठन का निर्माण कर इसमें ग्राम की महिलाओं को संगठित कर स्वसहायता समूहों का निर्माण किया गया। इसकी सहायता के लिए प्रत्येक 25 गांव पर एक संकुल संगठन बनाया गया इसका कार्य सभी के कार्यों का आंकलन करना है। ये उन्हें जांचने के साथ उनके लिए कच्चा माल पहुंचाने का कार्य करती है। शीर्ष पर प्रत्येक विकासखण्ड में मंडल संकुल स्तरीय संगठन बनाया गया जो इन सभी मास्कों के लिए बाजार की संभावनाओं पर नजर रखता है तथा उनके लिए कच्ची सामग्री के उपलब्धता को सुनिश्चित करता है। इस प्रकार एक निश्चित कार्ययोजना के साथ मास्क उत्पादन को जिला प्रशासन एवं पंचायत विभाग ने साझा रुप से अंजाम दिया गया।
107 समूह द्वारा अब तक 55 हजार मास्कों का किया गया निर्माण
जिले के 107 ग्रामीण महिला स्वसहायता समूह की 200 से अधिक सदस्य प्रतिदिन मास्क निर्माण में प्रयत्नशील रहे है और अब तक इनके द्वारा 56 हजार मास्कों का निर्माण किया जा चुका है। अब प्रत्येक दिन 3 हजार तक मास्क उत्पादन की क्षमता अब पूरे जिले में विकसित की जा चुकी है। अब जिले में प्रति दिन 6 हजार मास्क तक उत्पादन की क्षमता विकसित करने का लक्ष्य बनाया गया है।प
1 लाख 75 हजार मास्क का आर्डर प्राप्त हुआ
मास्क की गुणवत्ता अच्छी होने के साथ इनका मूल्य कम होने से इन मास्कों की मांग बहुत अधिक हैं। वर्तमान में जनपद पंचायत द्वारा इन्हें 15000 मास्क एवं वन विभाग द्वारा 1लाख 60 हजार मास्क का आर्डर दिया गयाभ् है। जिसमे से अब तक जनपद पंचायतों को 7 हजार एवं वन विभाग को 15000 मास्कों की आपूर्ति की जा चुकी है साथ ही व्यावसायिक तौर पर बिक्री के लिए भी मास्क दुकानों पर पहुंचाए जा रहे हैं।
इस पर कोण्डागांव वनमंडलाधिकारी उत्तम गुप्ता ने बताया कि अभी वनोपज संग्रहणकर्ताओं को कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए मास्क वितरित किया जाना है जिसके लिए मास्क उत्पादन का लक्ष्य जिले के समूहों को दिया गया है। जिससे कम दामों पर मास्क हमे मिल रहे हैं। इसके साथ बिहान समूहों द्वारा हमें सीमेंट पोल एवं फेन्सिंग तार एवं अन्य उत्पादों का भी क्रय किया जा रहा है।





