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छत्‍तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बनाने जेपी नड्डा ने दिया जीत का मंत्र

  • प्रदेश में सरकार से नाराज वर्गों से संपर्क पर बैठक में विशेष फोकस किया गया। बस्तर और सरगुजा में आदिवासी वर्ग नाराज है। सरकार की वादाखिलाफी के कारण सरकारी कर्मचारी नाराज हैं। युवाओं को रोजगार नहीं मिला, जिससे युवाओं का बड़ा वर्ग नाराज है। हर वर्ग की नाराजगी को अपने पाले में करने के लिए मंथन किया गया। इसके साथ ही मोर्चा-प्रकोष्ठ के कामकाज की भी समीक्षा की गई, जिसमें कुछ मोर्चा का कामकाज शून्य पाया गया है।

दिल्ली में भाजपा के केंद्रीय नेताओं ने छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ नेताओं के साथ करीब दो घंटे तक मंथन किया। प्रदेश संगठन की तरफ से 100 पेज का एक प्रजेंटेशन तैयार किया गया था, जिसमें यह बताने की कोशिश की गई कि वर्ष 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत कैसे होगी। इस बैठक में केंद्रीय संगठन ने साफ कहा कि आंदोलन के माध्यम से जनता की बात को उठाएं और सरकार को सक्रियता और गंभीरता के साथ घेरें।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णुदेव साय, पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह, नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक और संगठन महामंत्री पवन साय ने एक-एक सीट पर संगठन की तैयारी का ब्यौरा पेश किया। प्रदेश के भाजपा नेताओं की सुनने के बाद केंद्रीय संगठन ने तीन सूत्री फार्मूला दिया। केंद्रीय नेताओं ने कहा कि संगठन को मजबूत करने की दिशा में काम किया जाए। संगठन के नेता अपनी सक्रियता बढ़ाएं। भाजपा के केंद्रीय कार्यालय में राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष, राष्ट्रीय सहसंगठन महामंत्री शिवप्रकाश और सहप्रभारी नितिन नबीन की मौजूदगी में चर्चा शुरू हुई।

जेपी नड्डा के साथ बैठक के बाद भाजपा नेताओं ने बताया कि यह बैठक किसी को पद से हटाने के लिए नहीं, बल्कि प्रदेश में सरकार बनाने के लिए बुलाई गई थी। प्रदेश में भाजपा के उम्मीदवारों की जीत कैसे हो, किन-किन मुद्दों को लेकर चुनाव मैदान में जाना है, इस पर मंथन हुआ। राज्य सरकार की असफलता को जनता के बीच पहुंचाने की कार्ययोजना भी तैयार की गई।

प्रदेश में सरकार से नाराज वर्गों से संपर्क पर बैठक में विशेष फोकस किया गया। बस्तर और सरगुजा में आदिवासी वर्ग नाराज है। सरकार की वादाखिलाफी के कारण सरकारी कर्मचारी नाराज हैं। युवाओं को रोजगार नहीं मिला, जिससे युवाओं का बड़ा वर्ग नाराज है। हर वर्ग की नाराजगी को अपने पाले में करने के लिए मंथन किया गया। इसके साथ ही मोर्चा-प्रकोष्ठ के कामकाज की भी समीक्षा की गई, जिसमें कुछ मोर्चा का कामकाज शून्य पाया गया है।

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